कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर सोमवार को बंदी के बाद मंगलवार को बैंक खुले। नगर से लेकर गांव लोग नोट बदलने के लिए सुबह से लोग बैंकों के बाहर पंक्ति में लग गए। इस दौरान भीड़ को नियंत्रित करने में पुलिस कर्मियों को काफी मशक्कत झेलनी पड़ी। वहीं केंद्र सरकार के निर्देश पर अधिकांश बैंकों ने पालन करते हुए अलग-अलग लाइने लगवाईं। हालांकि एसबीआई धनघटा में इसका कोई असर नहीं दिखा। यहां रकम निकालने आईं प्रेमलता(42) गश खाकर गिर गईं। उपचार के बाद उन्हें होश आया।
शहर में चार एटीएम खुले रहे, जहां धन निकासी के लिए इस कदर भीड़ थी लोगों को अपनी बारी आने तक में तीन से चार घंटे लग गए। बैंकों व एटीएम पर भीड़ होने का असर यातायात व्यवस्था पर भी पड़ा। लोग अपने वाहन पटरियों पर खड़े कर लाइन में थे। इसके कारण बैंक चौराहा पर कई बार जाम की स्थिति बनी, जिससे राहगीरों को भी परेशानी उठानी पड़ी। स्टेट बैंक की मुख्य शाखा पर बैंक खुलने से पूर्व ही लंबी कतार लग गई थी। पास में ही बैंक के दो एटीएम भी चालू थे। तीनों स्थानों पर लंबी कतार दिनभर लगी रही। ऐसी ही स्थिति एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, पीएनबी, बैंक आफ बड़ौदा, ओरियंटल बैंक आफ कामर्स आदि बैंकों पर भी रही।
हैंसर प्रतिनिधि के अनुसार, रकम निकालने आईं नटवाबर गांव निवासी प्रेमलता देवी भी बैंक के बाहर सड़क तक लगी लंबी कतार में खड़ी थीं। करीब दोपहर एक बजे वह अचेत होकर गिर पड़ीं। उन्हें पास के एक दवाखाने में ले जाया गया, जहां उपचार के करीब दो घंटे बाद उन्हें होश आया। शाखा प्रबंधक एस के त्रिपाठी ने बताया कि बैंक में इस समय काफी भीड़ हो रही है। अंदर से बाहर तक लोग खडे़ हैं। ऐसे में क्या किया जा सकता है। इसी तरह पीएनबी धनघटा की शाखा पर भी रोजना की अपेक्षा मंगलवार को काफी भीड़ दिखी।
बखिरा प्रतिनिधि के अनुसार, रकम निकालने के लिए बैंक के बाहर खड़ी रीता, लाली, कुसुम, रामकरन, रामकुमार, दयाराम ने बताया कि तीन दिन से लगातार जमा करने के लिए बैंक में आ रहे हैं, किन्तु शाम होते-होते बगैर जमा किये घर वापस जाना पड़ रहा है। खेती काम रकम के अभाव में रुका हुआ है।
गेहूं की बुआई में देरी का असर फसल पर पड़ सकता है। बैंक के अंदर बाहर भीड़ के सब्र का बांध घंटों लाइन में लगने से 12 बजते-बजते टूट गया। लोगों ने अंदर जाने के लिये शोर मचाना शुरू कर दिया। व्यवस्था संभालने के लिए चौकी इंचार्ज राजकुमार पांडेय को भारी मशक्कत करनी पड़ी।