कार्तिक पूर्णिमा के पावन पर्व पर सोमवार को सरयू नदी के विभिन्न घाटों पर स्नान के बाद श्रद्धालुओं दान करके पुण्य अर्जित किया। भोर होते ही गंगा में जय गंगे के जय घोष से डूबकी लगना शुरू हुआ तो वह शाम तक चलता रहा। स्नान के बाद गो दान , कथा, कड़ाही चढ़ा कर लोगो ने मां गंगा से अपनी मुरादे पूरी करने की अर्चना किया। इस दौरान नदी के तट पर लगने वाले मेले में दुकान लगाए दुकानदारों की दुकानदारी पर एक हजार और पांच रुपये के बंदी का असर दिखा। दुकानदारों का कहना था कि दुकानदारी फीकी रही।
सरयू नदी के बिडहर, रामबाग, चांडीपुर, चहोडा, मैंदी समेत अन्य घाटों पर लोग भोर होते ही डूबकी लगाना शुरू कर दिए। बिड़हर घाट पर महाकाल के दरबार में श्रद्धालुओं कथा कड़ाही आदि कार्यक्रम करके अपनी मन्नते मां गंगा से पूरी करने की अर्चना की। महिलाएं कड़ाही चढ़ा कर मां गंगा से घर परिवार को सुखी रखने की मिन्नत की। नदी के किनारे वर्षों से मेले दुकान लगाने वाले भोला, प्रभुनाथ, दीपचंद, घरभरन आदि का कहना था कि साहब इस साल यहा की दुकानदारी में कोई फायदा नही होने वाला है। लोग हजार और पांच सौ की नोट लेकर आ रहे किस तरह उन्हें सामान दिया जाए। मेले में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात पुलिस के जवान पूरी तरह मुस्तैद रहे। जिससे कही से भी कोई अप्रिय घटना की सूचना नही है। यातायात सही ढंग से संचालित करने के लिए नेतवापुर के पास लगाए गए बैरियर पर तैनात पुलिस वाले दो पहिया व चार पहिया वाहन घाट तक नही जाने दिए जिससे कही पर भी जाम की समस्या उतपंन्न नही हुई। कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान करने के महत्ता को बताते हुए पंडित रामनरायन पांडेय कहते है कि वैसे पूर्णिमा तो हर माह में पडता है, लेकिन कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान, गो दान करना अधिक फलदाई होता है।
नोट बंद होने से मेले में नहीं रही रौनक
बेलहर। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर सोमवार को आमी नदी के राजघाट पर लोगों ने स्नान कर पूजा अर्चना किया। दुकान लगाए मोहन लाल, विकास अग्रहरि, छेदी, राम जतन, झीना, मदन अग्रहरी, राज कुमार मोदनवाल, उमाशंकर अग्रहरि, ओम प्रकाश, राजू मद्घेशिया, दीना मद्घेशिया, सतंराम, राम पति, विसिमिल्लाह, देव राज, फागू आदि लोगो ने बताया कि एक हजार और पांच सौ के नोट बंद होने से इस साल पूजी भी नही निकलने वाली है। सामान हर साल की तुलना में इस साल भी अधिक मात्रा में उठा लेने से नुकसान हो रहा है।