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मशीनें कम होने से डायलिसिस के लिए मरीजों को करना पड़ता है इंतजार

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जिला अस्पताल स्थित डायलिसिस सेंटर में भर्ती मरीज। - फोटो : KHALILABAD
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मशीनें कम होने से डायलिसिस के लिए मरीजों को करना पड़ता है इंतजार
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- सिर्फ पांच मशीनों पर 18 मरीजों की होती है 12 घंटे में डायलिसिस
- प्रभारी मंत्री ने मशीनों को बढ़ाने के दिए थे निर्देश
संतकबीरनगर। जिला अस्पताल के डायलिसिस केंद्र पर आने वाले मरीजों को डायलिसिस के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। पांच मशीनें मरीजों के डायलिसिस के लिए लगाई गई हैं, जो नाकाफी हैं। प्रतिदिन 35 से 40 मरीज डायलिसिस के लिए आते हैं। इनमें से मात्र 18 मरीजों का ही डायलिसिस हो पा रहा है, बाकी मरीजों को अगले दिन का समय दिया जा रहा है। पिछले दिनों दौरे पर आए प्रभारी मंत्री रविंद्र जायसवाल के सामने भी मशीनों की कमी का मामला उठा था। जिस पर उन्होंने मशीने बढ़ाने का निर्देश दिया था।
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जिला अस्पताल में मई माह में डायलिसिस केंद्र की शुरुआत हुई। यहां पर कुल छह मशीनें डायलिसिस के लिए लगी हैं। एक मशीन गंभीर बीमारी के मरीजों के लिए है, जबकि पांच मशीन सामान्य तरीके से डायलिसिस करती है। डायलिसिस केंद्र पर रोज 35 से 40 मरीज आते हैं और डायलिसिस के लिए रजिस्ट्रेशन कराते हैं। इनमें से 18 मरीजों की ही डायलिसिस हो पाता है। एक डायलिसिस मशीन पर करीब तीन घंटे मरीजों की डायलिसिस की जाती है। डायलिसिस केंद्र सुबह सात से शाम 10 बजे तक संचालित होता है। ऐसे में मशीनों की कमी मरीजों पर भारी पड़ रही है। 26 अगस्त को जिले में दौरे पर आए प्रभारी रविंद्र जायसवाल ने जिला अस्पताल का निरीक्षण किया था तो डायलिसिस केंद्र पर पहुंच कर उन्होंने मशीनों को बढ़ाने का निर्देश अधिकारियों को दिया था। प्रभारी मंत्री ने कहा कि मशीने बढ़ा दी जाए, जिससे मरीजों को कोई परेशानी न हो। इसके बाद से इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई। सीएमएस डॉ. ओपी चतुुर्वेदी ने बताया कि डायलिसिस की मशीनें बढ़ाने के लिए यूनिट का संचालन करने वाली संस्था को पत्र भेजा गया है। वैसे जो मरीज आते हैं, उनकी डायलिसिस की जाती है। गंभीर मरीजों को प्राथमिकता दी जाती है।
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