- जिला अस्पताल का हाल, डाॅक्टर की लिखी अधिकांश दवा अस्पताल में नहीं मिल रही
- दवा लेने में मरीजों और तीमारदारों का निकल रहा दम
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। शासन से मरीजों को बाहर की दवा न लिखे जाने के निर्देश के बावजूद जिला अस्पताल के डॉक्टर अधिकतर दवाएं बाहर की लिख रहे हैं। मरीजों के मुताबिक अस्पताल की पर्ची पर डाॅक्टर की लिखी अधिकांश दवा अस्पताल के औषधि केंद्र पर नहीं बल्कि बाहर मेडिकल स्टोर पर मिल रहा है।
जिला अस्पताल की रोज की ओपीडी औसतन 1200 मरीजों की होती है। एक रुपया की पर्ची बनवाकर मरीज सस्ते इलाज की आशा में चिकित्सक के पास पहुंचता है। चिकित्सक अस्पताल की पर्ची और एक कागज के छोटे टुकड़े पर लिखकर मरीज को देते हैं। पर्ची को लिए मरीज अस्पताल के औषधी काउंटर पर लाइन लगाता है। आधे घंटे से एक घंटे बाद उसका नंबर आता है तो पता चलता है कि उसे आधा दवा काउंटर से मिला, शेष दवा बाहर से लेनी होगी। एक रुपये की पर्ची लिए पांच सौ व हजार रुपये की दवा बाहर की मेडिकल स्टोर से खरीदने को मजबूर होता है।
बोले मरीज - आधी दवाएं बाहर से लेनी पड़ी
संतकबीरनगर। अस्पताल के बाहर मेडिकल स्टोर पर डाॅक्टर की पर्ची से दवा खरीद रहे विनोद कुमार अयोध्या के रहने वाले हैं। संतकबीरनगर में रहकर प्राइवेट नौकरी करते हैं। तीन दिन पहले उन्हें तेज बुखार और खासी था। विनोद के मुताबिक जिला अस्पताल के चिकित्सक को दिखाया तो कुछ दवा तो अस्पताल से मिल गई, लेकिन पांच सौ रुपये की दवा बाहर से खरीदना पड़ी। वहीं जिला अस्पताल में चार वर्षीय पोती आरुषि को लेकर पहुंची गीता देवी के मुताबिक उनकी पोती के पेट में दिक्कत है। आधी दवा अस्पताल से मिल गई है और आधी बाहर से खरीदनी पड़ रही है।
बाहर से 449 रुपये की मिली दवा
आंत में सूजन होने से जिला अस्पताल में दिखाने आए थे। अस्पताल के पर्चे पर लिखी दवा औषधि काउंटर पर आधा ही मिला। शेष दवा लेने वह अस्पताल के बाहर मेडिकल स्टोर पर पहुंचे। वहां से 449 रुपये की दवा खरीदनी पड़ी।
- व्यासमुनि, हैंसर बाजार
जिला अस्पताल में दवा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। मरीजों को बाहर से दवा नहीं लिखी जा रही है। इसकी जांच कराई जाएगी और बाहर से दवा लिखने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. भवनाथ पाण्डेय, सीएमएस