संतकबीरनगर। जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत कार्यरत कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर अब जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दिखने लगा है। जन आरोग्य मंदिरों में तैनात सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों और सीएचसी-पीएचसी में संविदा पर कार्यरत डॉक्टरों के हड़ताल पर रहने से जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। बुधवार को करीब 1900 मरीज इलाज कराने पहुंचे, जबकि सामान्य दिनों में ओपीडी में 1500 से 1600 मरीज आते हैं। वहीं, जिले में हड़ताल के नौवें दिन भी स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रहीं। कई स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों के नहीं मिलने से मरीजों को परेशानी उठानी पड़ी। कुछ मरीज बिना इलाज कराए ही लौट गए।
एनएचएम के तहत कार्यरत करीब 850 कर्मचारी नियमितीकरण, समान कार्य-समान वेतन समेत विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। इसका असर ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। जन आरोग्य मंदिरों पर ताले लटकने और सीएचसी-पीएचसी में संविदा डॉक्टरों के उपलब्ध नहीं होने से मरीज जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। इससे नियमित डॉक्टरों के कक्षों में भीड़ बढ़ गई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था की गई है, लेकिन मरीजों की परेशानी कम नहीं हो पा रही है।
बघौली निवासी एक मरीज ने बताया कि उनके क्षेत्र के जन आरोग्य मंदिर पर ताला लगा है। वहां उपचार नहीं मिलने पर जिला अस्पताल आना पड़ा। यहां भी मरीजों की अधिक भीड़ होने के कारण इलाज के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। अन्य मरीजों को भी इसी तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
सीएमएस डॉ. रमाशंकर सिंह ने बताया कि शासन के निर्देश पर कर्मचारियों और चिकित्सकों के अवकाश पर रोक लगाई गई है। विशेष परिस्थितियों में ही अवकाश स्वीकृत किया जाएगा।
डॉक्टरों की छुट्टियों पर रोक
मरीजों को उपचार उपलब्ध कराने के लिए जिला अस्पताल प्रशासन ने उपलब्ध डॉक्टरों की ड्यूटी का समय बढ़ा दिया है। साथ ही डॉक्टरों के अवकाश पर रोक लगा दी गई है। अब केवल विशेष परिस्थितियों में ही छुट्टी दी जा रही है, ताकि डॉक्टरों की कमी के बावजूद ओपीडी का संचालन जारी रखा जा सके।