27 दिन में खरीदा लक्ष्य का सिर्फ 12 फीसदी धान
संतकबीरनगर। जिले में सरकारी धान की खरीद का बुरा हाल है। 27 दिन में लक्ष्य के सापेक्ष सिर्फ 12 फीसदी धान की खरीद हो पाई है। पीसीएफ के पांच क्रय केंद्रों पर अब तक एक छटाक धान की खरीद नहीं हुई है। डीएम की ओर से धान खरीद शुरू नहीं करने वाले केंद्र प्रभारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए एआर कोआपरेटिव और जिला प्रबंधक पीसीएफ को पत्र भेजा गया है।
धान की खेती में लागत को देखते हुए शासन ने पिछले वर्ष की तुलना में इस खरीफ वर्ष में 65 रुपये प्रति क्विंटल अधिक दाम दे रही है। जनपद के किसान खाद्य एवं विपणन विभाग की वेबसाइट पर पंजीकरण करा कर अपना धान नजदीकी क्रय केंद्र पर बेच सकते हैं। शासन की ओर से इस वर्ष जनपद में धान खरीद के लिए 45000 मीट्रिक टन का लक्ष्य निर्धारित किया है। धान खरीद के लिए कुल 50 क्रय केंद्र खोले गए हैं। खाद्य विभाग के आठ, पंजीकृत समितियों के पांच ,पीसीएफ के 35 और कर्मचारी कल्याण निगम के दो केंद्र हैं।
आलम ये है कि अब तक सिर्फ 5028 .33 मीट्रिक टन धान की खरीद हो पाई है, जो लक्ष्य का सिर्फ 12 फीसदी है। पूर्व में डीएम की मौजूूदगी में कलेक्ट्रेट में चल रही बैठक में बघौली क्षेत्र का एक किसान प्लास्टिक की पन्नी में धान लेकर पहुंच गया था और अवगत कराया था कि जिले में धान की खरीद ठीक से नहीं हो रही है। बावजूद इसके खरीद की स्थिति में सुधार नहीं हो पा रही है। किसान अतुल पांडेय, हरिश्चंद्र चौधरी, मिंटू पांडेय आदि ने बताया कि धान बेचने के लिए किसान भटक रहे हैं। कहीं धान में अधिक नमी बता कर खरीद करने से केंद्र प्रभारी कतरा जा रहा है तो कहीं केंद्र पर कोई समुचित उत्तर देने वाला नहीं मिल रहा है। ऐसे में प्रशासन को चाहिए कि सरकारी धान की समुचित खरीद किए जाने की व्यवस्था कराएं।
डिप्टी आरएमओ रामानंद जायसवाल ने बताया कि यह सच है कि अब तक लक्ष्य के सापेक्ष 12 फीसदी धान की खरीद हुई है, लेकिन 11 नवंबर के बाद से ही किसान केंद्रों पर धान बेचने पहुंच रहे है। पीसीएफ के पांच केंद्रों पर अभी तक खरीद शुरू नहीं हुई है। जिसमें रजापुर सरैया, बढया, कोदवट और छितौनी क्रय केंद्र शामिल है। डीएम की ओर से संबंधित केंद्र प्रभारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए एआर कोआपरेटिव व पीसीएफ के जिला प्रबंधक को पत्र भेजा गया है। साथ में निर्देश दिए गए हैं कि इन केंद्रों पर भी खरीद शुरू कराएं। केंद्रों की जांच भी जिम्मेदार अधिकारी लगातार कर रहे हैं। जहां किसी तरह की शिकायत मिलेगी, वहां जांच कर कार्रवाई की जाएगी। पिछले वर्ष प्रति क्विंटल 1750 रुपये खरीद दर निर्धारित था, जबकि इस वर्ष 1850 रुपये हो गया है। ऐसे में पिछले वर्ष की तुलना में किसानों को प्रति क्विंटल 65 रुपये अधिक मिलेगा।