संतकबीरनगर। डिजिटल युग में सोशल मीडिया जहां सूचना, संपर्क और अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है, वहीं इसका अनियंत्रित और गलत उपयोग पारिवारिक रिश्तों की नींव को कमजोर कर रहा है। पहचान छिपाकर बनाए जा रहे ऑनलाइन रिश्ते और सोशल मीडिया पर पनप रहे प्रेम संबंध कई मामलों में किशोरों और युवाओं को परिवार से दूर कर रहे हैं। नतीजतन घरों में संवाद कम हो रहा है और भावनात्मक दूरी बढ़ती जा रही है।
फेसबुक, इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी या आंशिक पहचान के साथ दोस्ती करने का चलन तेजी से बढ़ा है। शुरुआत सामान्य बातचीत से होती है, जो धीरे-धीरे नियमित चैटिंग और प्रेम संबंधों में बदल जाती है। कई मामलों में यह जुड़ाव इतना गहरा हो जाता है कि किशोर और युवा पारिवारिक और सामाजिक सीमाओं को नजरअंदाज करने लगते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि आज कई परिवारों में मोबाइल फोन ने संवाद की जगह ले ली है। एक ही छत के नीचे रहते हुए भी माता-पिता और बच्चे अपने-अपने मोबाइल में व्यस्त रहते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि बच्चों की गतिविधियों, मानसिक स्थिति और ऑनलाइन संपर्कों पर समय रहते ध्यान नहीं जा पाता। इसी खालीपन में सोशल मीडिया कई बार उन्हें गलत फैसलों की ओर धकेल देता है।
ऑनलाइन रिश्तों के बढ़ते जोखिम
केस-1 : पुलिस कार्रवाई के डर से साथ रहने का फैसला
कोतवाली खलीलाबाद थाना क्षेत्र की एक युवती की प्रयागराज निवासी युवक से इंस्टाग्राम के जरिए पहचान हुई। बातचीत बढ़ने के साथ दोनों के बीच प्रेम संबंध बन गए। बाद में युवक द्वारा दूरी बनाए जाने पर युवती ने थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस कार्रवाई की आशंका के बीच दोनों ने आपसी सहमति से साथ रहने का निर्णय लिया।
केस-2 : रुपये और जेवर लेकर प्रेमी के पास पहुंची किशोरी
दुधारा थाना क्षेत्र के एक किशोर की आजमगढ़ निवासी किशोरी से सोशल मीडिया पर दोस्ती हुई। प्रेम संबंध प्रगाढ़ होने के बाद किशोरी घर से रुपये और जेवर लेकर प्रेमी के पास पहुंच गई। दोनों के नाबालिग होने की जानकारी पर परिजनों ने आपसी बातचीत के जरिए मामला सुलझाया और किशोरी को वापस घर ले जाया गया।
केस-3 : फर्जी पहचान से बना रिश्ता, बाद में कानूनी कार्रवाई
कोतवाली क्षेत्र के एक युवक ने सोशल मीडिया पर फर्जी पहचान बनाकर झारखंड की युवती से संपर्क किया। दोनों ने आपसी सहमति से विवाह कर किराये के मकान में रहना शुरू किया। बाद में पहचान से जुड़े विवाद और युवती की शिकायत पर मामला दर्ज हुआ, जिसमें युवक और उसके परिजनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई।
विशेषज्ञ बोले-
सोशल मीडिया का असंतुलित उपयोग पारिवारिक संवाद को कमजोर कर रहा है। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों के साथ समय बिताएं और उनके डिजिटल व्यवहार पर संतुलित निगरानी रखें। -डॉ. विजय मिश्रा, एसोसिएट प्रोफेसर, समाजशास्त्र विभाग, एचआर पीजी कॉलेज
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सोशल मीडिया का अत्यधिक और गलत उपयोग संवादहीनता, अविश्वास और अकेलेपन को बढ़ा रहा है। एक ही घर में रहते हुए भी डिजिटल दुनिया में खोए रहना रिश्तों की भावनात्मक गहराई को नुकसान पहुंचाता है।- डॉ. तन्वांगी मणि शुक्ला, मनोचिकित्सक, जिला अस्पताल
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सतर्कता ही समाधान
विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी संभव नहीं, लेकिन संतुलन और संवाद से इसके दुष्प्रभाव को कम किया जा सकता है। समय रहते संवाद, भरोसा और निगरानी ही पारिवारिक रिश्तों को टूटने से बचा सकती है।