बखिरा इलाके में धान की रोपाई करते किसान। संवाद
मेंहदावल। विकासखंड क्षेत्र के 11 गांव इस बार फिर बखिरा झील के पानी से परेशानी झेलेंगे। चोरमा नाले पर रेगुलेटर निर्माण की अभी तक स्वीकृति नहीं मिल पाई है। वहीं बरसात शुरू हो गई है, धीरे-धीरे राप्ती नदी का पानी बढ़ रहा है।
क्षेत्र में बखिरा झील के पानी से बरसात में जहां कई गांवों में पानी से भर जाता है, वहीं सैकड़ों एकड़ फसल भी बर्बाद होती है। इन गांव व फसल को बचाने के लिए लंबे समय से गोरखपुर-संतकबीरनगर सीमा पर स्थित चोरमा नाले पर रेगुलेटर लगाने की मांग चल रही है।
विधायक अनिल त्रिपाठी ने इस मामले को शासन तक उठाया। वर्ष 2023-24 में गंडक बाढ़ खंड गोरखपुर द्वारा प्रस्ताव बनाकर भेजा गया। इस परियोजना पर कुल 7586.73 लाख रुपये खर्च होंगे। सहजनवा के डुमरिया बाबू तटबंध पर चोरमा नाले पर रेगुलेटर व पंपिंग स्टेशन का निर्माण होगा। इससे बखिरा झील से भरने वाले पानी को निकाल कर राप्ती में गिराया जा सकता है, लेकिन इस परियोजना को स्वीकृत नहीं मिली है। इसके कारण एक बार फिर किसानों की चिंता बढ़ रही है।
पूर्व प्रधान निरंजन विश्वकर्मा दीपचंद साहनी हरिश्चंद्र यादव राजीव यादव जगदंबा तिवारी अवनींद्र नाथ त्रिपाठी आदि का कहना है कि बखिरा झील के पानी से प्रतिवर्ष फसल बर्बाद होती है। गगनई राव, गगनई बाबू धौरापार भरवलिया पांडेय बौधरा मेहावर पचनेउरी धनेज बरईपुर नहुनी घूरापाली आदि गांव झील के पानी से प्रभावित होते हैं।
-
बखिरा झील के पानी से फसलों का नुकसान होता आ रहा है। चोरमा में रेगुलेटर से इस समस्या का समाधान होगा।
-सूरज तिवारी, छपिया अंगद
-
चोरमा रेगुलेटर के लिए कई बार आंदोलन हो चुका है। इससे सैकड़ों एकड़ फसल प्रतिवर्ष बर्बाद होती है। शासन, प्रशासन को इस दिशा में ठोस कदम उठाना चाहिए।
-संदीप सिंह, नौगो