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पोषाहार घपले में 18 आंगनबाड़ी वर्करों की सेवा समाप्त

Tue, 29 Dec 2015 12:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/संतकबीरनगर
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तीन वर्ष पहले सेमरियावां गांव के ककरहवा टोला से काला बाजारी के लिए रखे बाल पोषाहार मामले में आखिरकार 18 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई हो ही गई। कई स्तरों पर हुई जांच के बाद अब विभाग ने सभी को विभागीय कार्य में लापरवाही, पोषाहार वितरण में अनियमितता का दोषी मानते हुए उनकी संविदा समाप्त कर दिया।
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इसके साथ ही समस्त कागजात का चार्ज संबंधित आंगनवाड़ी केंद्र की सहायिका अथवा सुपरवाइजर को देने का निर्देश दिया है। सेमरियावां ग्राम पंचायत के ककरहवा टोला निवासी हरिगोविंद के घर से 19 नवंबर 2013 को 920 बोरी बाल पोषाहार बरामद हुआ था।
तत्कालीन डीएम डॉक्टर इंद्रवीर सिंह यादव ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए मामले में आरोप निर्धारित करने के लिए कमेटी गठित करके जांच करवाया था। तत्कालीन बीडीओ श्रीकृष्णा के नेतृत्व में हुई 212 केंद्रों की जांच में 70 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को दोषी पाया गया था।
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मामले में कार्यालय लिपिक और सभी सात सुपरवाइजरों को निलंबित कर दिया गया था। खंड विकास अधिकारी की जांच और बाल विकास परियोजना अधिकारी की जांच आख्या में भिन्नता होने के कारण सीडीओ ने अभिलेखों और जांच आख्या का परीक्षण करने के लिए जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी और डीपीओ व तत्कालीन बीडीओ उपेंद्र पाठक से करवाया था। अब जांच रिपोर्ट के आधार पर अब मामले में कार्रवाई की गई है।
डीर्पीओ अण कुमार दूबे ने बताया कि कार्यकर्ताओ की स्टॉक पंजिका, सीडीपीओ कार्यालय की स्टॉक पंजिका और कार्यकर्ताओं के वितरण रजिस्टर व पूर्व जांच कमेटी की रिपोर्ट का अवलोकन किया गया। कारण बताओ नोटिस के जबाब का भी संज्ञान लिया गया। इसके बाद 18 कार्यकर्ताओं पर करीब 400 बोरी पोषाहार का गबन पाया गया। जिसकी वजह से 18 कार्यकर्ताओं की सेवा समाप्त कर दी गई है।
जबकि 52 कार्यकर्ता दोषमुक्त हो गईं। आगे बताया कि तत्कालीन सीडीपीओ व सात सुपरवाईजर के अलावा लिपिक की भूमिका भी संदिग्ध मिली। जिसकी वजह से सुपरवाईजर निलंबित हुई थीं जो पौने दो साल बाद बहाल हुईं, लेकिन उन लोगों का दो इंक्रीमेंट रोक दिया गया और उन लोगो के खिलाफ 520 बोरी पोषाहार की धनराशि की रिकबरी कराए जाने का निर्देश दिया गया है। तत्कालीन सीडीपीओ और सुपरवाईजरों के खिलाफ निदेशालय स्तर से विभागीय जांच भी शुरु हो गई है। 
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