जिला पंचायत अध्यक्ष संतोष यादव के खिलाफ गुरुवार को 26 जिला पंचायत सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है। अपराह्न तीन बजे कलेक्ट्रेट पहुंचे सदस्यों ने डीएम को शपथ पत्र सौंपा। जिला पंचायत सदस्य अशोक चौधरी के नेतृत्व में पहुंचे सदस्यों ने अध्यक्ष पर सदस्यों की उपेक्षा व विकास कार्यों में मनमानी का आरोप लगाया है।
सूबे में सत्ता बदलने के बाद से ही जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास की सुबगुबाहट शुरू हो गई थी। बृहस्पतिवार को 32 जिला पंचायत सदस्यों में से 26 जिला पंचायत सदस्य कलेक्ट्रेट पहुंचें और डीएम को अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया। इसके साथ ही सदस्यों ने शपथ पत्र भी दिया। इस दौरान जो सदस्य उपस्थित रहे, उनमें अशोक चौधरी, संतोष चौहान, संजय राना, राजेश पहलवान, बलराम यादव, नीना देवी, इमराना खातून, प्रेमलता सिंह राठौर, प्रेमलता, मालती देवी, उषा देवी, प्रमोद यादव, कौशिल्या देवी, संजय यादव, राम जनक निषाद, गयासुद्दीन, जब्बार, अर्जुन चौधरी, मुकेश यादव मन्ने, मेहताब अहमद, इसरतजहां, अनीता यादव, वीरेंद्र पांडेय, शाबरा खातून, रूखसाना खातून, कलीमुन्निशा शामिल रहे। डीएम ने एक-एक सदस्यों के नोटिस का परीक्षण किया और सदस्यों से उनके हस्ताक्षर आदि के बारे में जानकारी ली। संतुष्ट होने के बाद डीएम ने 10 जून को पूर्वाह्न 11 बजे से कलेक्ट्रेट सभागार में जिला पंचायत की बैठक बुलाने का निर्देश दिया।
इस दिन चर्चा के बाद शक्ति परीक्षण किया जाएगा। इसके लिए एसडीएम सदर उमेशचंद्र निगम को मजिस्ट्रेट नामित करते हुए बैठक के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी। इधर सदस्यों का नेतृत्व कर रहे जिला पंचायत सदस्य अशोक चौधरी ने कहा कि जब से जिला पंचायत अध्यक्ष ने कुर्सी संभाली है तभी से सदस्यों की उपेक्षा करते रहे। सदस्यों की मंशा के विपरीत मनमाने ढंग से टेंडर कराया और अपने चहेतों को ही ठेका दिया। इससे सभी सदस्यों में आक्रोश था। उन्होंने कहा कि 26 सदस्यों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव की नोटिस दिया जाना यह साबित करता है जिला पंचायत अध्यक्ष सदस्यों का विश्वास खो चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि जिला पंचायत अध्यक्ष संतोष यादव ने 14 जनवरी 2016 को अध्यक्ष की कुर्सी संभाली थी। एक साल चार माह 11 दिन में ही उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की नोटिस आ गया। अब दस जून को होने वाली बैठक पर सभी की निगाह टिक गई हैं।