छठ पूजा: खरना के बाद शुरू हुआ निर्जल व्रत
- अस्ताचल गामी सूर्य को आज अर्घ्य देंगी महिलाएं
- पोखरों और नदियों के किनारे पूजा के लिए स्थान निर्धारित
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। बृहस्पतिवार को खरना के बाद छठ का निर्जल व्रत शुरू हो गया। वहीं शहर सहित ग्रामीण क्षेत्र के पोखरे और नदी के किनारे स्थित पूजा स्थलों पर साफ-सफाई की गई। प्रकाश आदि की व्यवस्था भी की गई है। वहीं छठ पर्व को लेकर बाजारों में सामानों की खरीदारी के लिए भीड़ लगी रही।
छठ पर्व की शुरूआत नहाय खाय के दिन से हो गई थी। बृहस्पतिवार को खरना के बाद निर्जन व्रत रख महिलाएं सामानों की खरीदारी की। खलीलाबाद शहर के मुखलिसपुर तिराहा, गोला बाजार, समय जी स्थान आदि जगहों पर सामानों की खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ लगी रही। बाजार में डलिया, नारियल सभी प्रकार के फल, जमीरी नीबू, गन्ना, पत्ते सहित हल्दी, अदरक, सिंघाड़ा, कच्ची मूंगफली, गट्टा, बताशा, मिठाई आदि के दुकानों पर महिलाओं की भीड़ लगी रही। इसके साथ ही खलीलाबाद के कोतवाली के उत्तर के पोखरे, सुगर मिल, हनुमान गढ़ी स्थित पोखरा और बिधियानी के पोखरे के पास साफ सफाई नगर पालिका के कर्मचारियों ने की।
चेयरमैन श्याम सुंदर वर्मा ने पोखरों की सफाई व्यवस्था का निरीक्षण किया और बेहतर व्यवस्था करने का निर्देश कर्मियों को दिया। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी को देखते हुए सोशल डिस्टेंसिंग के साथ छठ पूजा करे। मगहर के आमी नदी के किनारे शिवमंदिर से बाईपास तक घाट के किनारे प्रकाश की व्यवस्था पूर्ण करा ली गई है। इसी प्रकार मेंहदावल में कुबेरनाथ, बखिरा में भंगेश्वरनाथ हरिहरपुर में कठिनईया के किनारे और धनघटा में घाघरा के तटों पर लोगों ने अपने अपने लिए पूजा स्थल निर्धारित किए। राप्ती के तट पर भी ग्रामीणों द्वारा अपने स्तर से जगह-जगह पूजा स्थलों की सफाई की गई।
सूरज डूबने के पहले घाट पर पहुंचे
पंडित वाचस्पति द्विवेदी ने बताया कि शुक्रवार को सायंकाल सूरज डूबने के पहले नदी के घाट पर पहुंच कर अपना स्थान निर्धारित कर लेें। वहां पर डूबते सूर्य को अर्घ्य दे इसके बाद उसी स्थान पर शनिवार की सुबह पहुंच कर अर्घ्य दें और घाट पर वेदी बनाकर छठ माता का पूजन करें।