हरिहरपुर। नाथनगर ब्लाॅक में पेयजल परियोजनाओं का बुरा हाल है। विभागीय लापरवाही का आलम यह है कि कहीं बनकर तैयार परियोजना की सप्लाई ट्रायल में फेल हो गई तो कहीं टंकी निर्माण कार्य अधर में छोड़ ठेकेदार चले गए। परियोजना की स्वीकृत धनराशि भी खपा दी गई लेकिन ग्रामीणों को शुद्ध पानी नसीब नहीं हो सका।
परियोजनाएं चालू न होने से दो ग्राम पंचायतों महुली और मुकुंदपुर की करीब 17 हजार की आबादी आज भी शुद्ध पेयजल को तरस रही है।
हरिहरपुर के महुली में 10 साल पहले चार करोड़ 23 लाख की लागत से पेयजल परियोजना की स्वीकृति मिली थी। राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के तहत कार्यदायी संस्था जल निगम को निर्माण कार्य का जिम्मा सौंपा गया था, जिससे महुली सहित ग्राम पंचायत में शामिल कुल आठ गावों की करीब 15 हजार की आबादी को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने का लक्ष्य था।
ग्रामीण व्यापारी नेता दीपक वर्मा, व्यवसायी सुरेंद्र कुमार मद्धेशिया, मिश्रीलाल, दीपक, पिंटू, अमित, राधे श्याम ने बताया कि परियोजना के तहत पेयजल आपूर्ति के लिए गावों तक पाइप लाइन बिछा दिया गया है। हर घर के सामने टोटियों को लिए पाइप भी लगा दिया गया है। संवाद