संतकबीरनगर। पीलिया (ज्वांडिस) के इलाज में लापरवाही न बरतें, वरना परेशानी बढ़ जाएगी। जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 15 से 20 मरीज पीलिया के पहुंच रहे हैं। इनमें बच्चे भी शामिल हैं। चिकित्सक ठंड से बचाव और फास्ट फूड से दूर रहने की सलाह दे रहे हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि बुखार चढ़े, उल्टी हो, भूख न लगे, त्वचा का रंग और आंखें पीली दिखें तो तुंरत डॉक्टर को दिखाएं। समय से इलाज न होने पर पीलिया गंभीर हो सकती है। डॉ. कुमार सिद्धार्थ ने बताया कि हर रोज उनके पास छह से सात मरीज आ रहे हैं। इसके साथ ही अस्पताल में प्रतिदिन 20 के करीब मरीज पीलिया के आते हैं। इसमें बच्चे भी शामिल हैं। आमतौर पर बच्चों की स्किन देखकर पीलिया का पता लगाना मुश्किल होता है। सबसे ज्यादा परेशानी दूषित पानी पीने और लीवर में दिक्कत होने से हो रही है।
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पीलिया होने पर डेयरी उत्पादों से परहेज करें
दूध, पनीर, मक्खन, दही आदि डेयरी उत्पादों से परहेज करें। अंडा, मीट, चिकन और चिकनाई वाला खाना बिलकुल न खाएं। जिन चीजों में प्रोटीन की मात्रा अधिक हो उनसे दूरी बनाए रखें। खुले में रखी चीजें, बासी भोजन और कटे-फटे फल बिलकुल न खाएं।
पीलिया के लक्षण
- त्वचा का रंग पीला दिखना।
- ठंड लगना, बुखार, खुजली, पेशाब का रंग गहरा पीला होना
- भूख न लगना, उल्टी या जी मिचलाना।
- सिरदर्द या सिर के दाहिने भाग में दर्द रहना।
- अचानक वजन कम होना या लगातार वजन में कमी महसूस होना।