- सांथा क्षेत्र के परसिया में चल रहे श्रीराम कथा का आयोजन
सांथा। क्षेत्र की ग्राम पंचायत परसिया में हनुमान मंदिर पर चल रहे नौ दिवसीय संगीतमय श्रीरामकथा के चौथे दिन कथावाचक धनंजय ने प्रभु श्रीराम की बाल लीलाओं का प्रसंग सुनाया। कथा सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए।
कथावाचक ने प्रभु श्रीरामचंद्र के बाल क्रीड़ा की कथा सुनाई। बताया कि एक बार माता कौशल्या ने रामचंद्र को स्नान कराया और शृंगार करके पालने पर लिटा दिया। फिर अपने इष्टदेव की पूजा के लिए स्नान किया। पूजा करके नैवेद्य चढ़ाया और स्वयं वहां गईं, जहां रसोई बनाई गई थी। फिर माता पूजा के स्थान पर लौट आई और वहां आने पर पुत्र को भोजन करते देखा। माता भयभीत होकर पुत्र के पास गई तो वहां बालक को सोया हुआ देखा। फिर देखा कि वही पुत्र वहां भोजन कर रहा है। उनके हृदय में कंपन होने लगी। वह सोचने लगी कि यहां और वहां मैंने दो बालक देखे। यह मेरी बुद्धि का भ्रम है या और कोई विशेष कारण है।
कथावाचक ने आगे बताया कि प्रभु राम माता को घबराया हुआ देखकर मधुर मुस्कान से हंस दिए फिर उन्होंने माता को अपना अखंड अद्भूत रूप दिखलाया। उनके एक-एक रोम में करोड़ों बह्मांड समाहित दिखे, जिसे देखकर माता का शरीर पुलकित हो गया। मुख से वचन नहीं निकला। आंखें मूंदकर माता ने रामचंद्र के चरणों में सिर नवाया। माता को आश्चर्य चकित देखकर श्रीराम ने फिर बाल रूप धारण कर लिया।