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Sant Kabir Nagar News: खतौनी और आधार कार्ड में मेल नहीं खा रहा नाम...फार्मर रजिस्ट्री में दिक्कत

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नगर पंचायत हरिहरपुर में फाॅर्मर रजिस्ट्री करते लेखपाल सुनील कुमार गौड़, कानूनगो अनिल शर्मा तथा
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संतकबीरनगर/ महुली। फार्मर रजिस्ट्री को लेकर किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खतौनी और आधार कार्ड में नाम का मेल न होने के चलते फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है। वहीं इस कार्य को पूरा कराने के लिए प्रशासन ने राजस्व कर्मियों की ड्यूटी लगाई है। दूसरी ओर सहज जन सेवा केंद्रों पर भी यह काम हो रहा है। इसके बावजूद किसानों को परेशानी हो रही है।
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फार्मर रजिस्ट्री कराने पहुंच रहे ऐसे किसान जिनका नाम खतौनी के मेन कालम में नहीं है, उन्हें भी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा जिन किसानों का नाम आधार और खतौनी से मेल नहीं खा रहा है, उनकी फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है।
इस संबंध में धनघटा के नायब तहसीलदार राजेश मिश्रा ने बताया कि जिन किसानों का नाम मेन कालम या आधार और खतौनी से मेल नहीं खा रहा है, वह तहसील पहुंच कर तत्काल इसको सही कराकर अपनी फार्मर रजिस्ट्री करा लें। अन्यथा किसान योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाएंगे। अगर फार्मर रजिस्ट्री नहीं कराते हैं तो खाद, बीज और क्रय केंद्र पर गेहूं-धान की बिक्री नहीं हो पाएगी। किसान सम्मान निधि जैसे लाभों से भी लाभान्वित नहीं हो पाएंगे।
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धनघटा संवाद के अनुसार तहसील में किसानों के लिए फार्मर रजिस्ट्री की प्रक्रिया टेढ़ी खीर बनती जा रही है। आधार कार्ड और खतौनी में नामों के अंतर के कारण बड़ी संख्या में किसानों की रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है, जिससे वे भटकने को मजबूर हैं। इतना ही नहीं जिन गांवों में चकबंदी प्रक्रिया प्रचलित है उनके किसानों की फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है।
कृषि विभाग द्वारा जारी सूची में सामने आया है कि कई किसानों के नाम आधार कार्ड में अलग और खतौनी (राजस्व अभिलेख) में अलग दर्ज हैं। इस विसंगति के चलते फार्मर रजिस्ट्री की प्रक्रिया जटिल हो गई है। परिणामस्वरूप किसान न तो समय से अपनी रजिस्ट्री पूरी कर पा रहे हैं और न ही सरकारी योजनाओं का लाभ ले पा रहे हैं।

सबसे बड़ी चिंता यह है कि बिना फार्मर रजिस्ट्री के किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ मिलने पर भी संकट खड़ा हो गया है। साथ ही रजिस्ट्री न होने की स्थिति में किसान सरकारी क्रय केंद्रों पर अपना गेहूं भी नहीं बेच पाएंगे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ेगा। सरकार की ओर से शत-प्रतिशत फार्मर रजिस्ट्री का लक्ष्य तय किया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर तहसील, कृषि विभाग और आधार डेटा में तालमेल की कमी इस लक्ष्य को पूरा करने में बाधा बन रही है।

तहसील के चक्कर काटने को किसान मजबूर
धनघटा के क्षेत्रीय किसान सभाजीत, वाचस्पति, रामनौकर, दालसिंगार आदि का कहना है कि सरकार को तत्काल आधार और खतौनी के नामों में समन्वय स्थापित करने के लिए विशेष अभियान चलाना चाहिए। साथ ही, फार्मर रजिस्ट्री की प्रक्रिया को सरल बनाकर स्थानीय स्तर पर समाधान की व्यवस्था की जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके।
यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आने वाले समय में बड़ी संख्या में किसान सरकारी योजनाओं और समर्थन मूल्य पर बिक्री से वंचित रह सकते हैं। इस संबंध में तहसीलदार रामजी ने कहा कि जिन गांवों में चकबंदी प्रक्रिया प्रचलित है। उनकी फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो रही है। इस समस्या का समाधान शासन स्तर पर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तहसील स्तरीय कार्य तहसील पर तेजी के साथ किया जा रहा है।

प्राइवेट दुकानों से करा रहे फार्मर रजिस्ट्री
मेंहदावल। तहसील क्षेत्र में अभी कुछ किसान इससे अनभिज्ञ हैं वहीं कुछ तहसील आने की जगह गांव में स्थित कंप्यूटर संचालकों के पास जा रहे हैं। किसानों का कहना है कि राजस्व कर्मियों की टीम गांव तथा शहर में कैंप लगाकर यदि फार्मर रजिस्ट्री का कार्य करे तो इसमें तेजी आएगी। लोगों का कहना है कि खेती-बाड़ी का समय चल रहा है ऐसे में 15 से 20 किलोमीटर की दूरी तय कर तहसील मुख्यालय आना और पूरे दिन रहकर फार्मर रजिस्ट्री कराना संभव नहीं है।
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ढोढ चौराहे पर स्थित कंप्यूटर की दुकान से फार्मर रजिस्ट्री का रजिस्ट्रेशन कराया हूं। तहसील मुख्यालय हमारे यहां से काफी दूर है, ऐसे में स्थानीय दुकान से फार्मर रजिस्ट्री कराया।
-बबलू यादव, नगपुर



अभी फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पाई है। खेती का समय चल रहा है, सुबह से शाम तक इसी में व्यस्त रहना पड़ रहा है। खेती किसानी के समय में समय नहीं निकल पा रहा है। क्षेत्र में हल्का अनुसार कैंप लगता तो काम हो जाता, लेकिन यहां कोई व्यवस्था नहीं है।
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-मुग्गन यादव, छपिया अंगद
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