पूर्ति निरीक्षक की जांच में खुली थी पोल, मुकदमे की विवेचना में सहयोग नहीं करने का भी आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। सत्र न्यायाधीश देवेंद्र सिंह ने सरकारी अनाज की कालाबाजारी करने के आरोपी महिला कोटेदार और उसके पति की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी।
जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) विशाल श्रीवास्तव ने बताया कि पूर्ति निरीक्षक अश्विनी कुमार श्रीवास्तव ने 13 दिसंबर 2022 को खलीलाबाद तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत बिगरामीर की महिला कोटेदार सरीफुन्निशा की दुकान पर आकस्मिक जांच किया था। जांच के दौरान कोटेदार के पति अब्दुल मजीद उपस्थित मिले। उन्होंने दुकान पर स्टॉक का भौतिक सत्यापन कराया गया। सत्यापन के दौरान विक्रेता के स्टॉक में गोदाम में 13 क्विटंल गेहूं अधिक तथा एक क्विटंल चावल वास्तविक स्टॉक से कम पाया गया।
इस संबंध में विक्रेता के पति संतोषजनक जवाब नहीं पाए। विक्रेता द्वारा कार्ड धारकों के बीच मानक के अनुरूप वस्तुओं का वितरण नहीं करके कालाबाजारी कर 13 क्विटंल गेहूं गोदाम में एकत्रित किया गया था। एक क्विटंल चावल का वितरण कार्ड धारकों के बीच न कर उसका दुरुपयोग किया गया। कोटेदार शरीफुन्निशा एवं वितरण कार्य में सहयोगी उनके पति अब्दुल मजीद के विरुद्ध अभियोग पंजीकृत हुआ।
आरोपियों ने सत्र न्यायाधीश की कोर्ट में अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि गेहूं और चावल का वितरण कार्ड धारकों के बीच न कर दुरुपयोग किया गया है। आरोपियों की अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त किए जाने योग्य है। इस संबंध में विवेचक ने आरोपियों के घर जाकर नोटिस देकर पूछताछ में सहयोग करना चाहा, लेकिन आरोपियों ने सहयोग नहीं किया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने आरोपी दंपती की जमानत खारिज कर दी।