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अधिकांश एटीएम के शटर गिरे रहे 

Sun, 20 Nov 2016 11:22 PM IST
Sant Kabir Nagar
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बैंक चौराहे पर सुबह से रात तक बंद रहा पीएनबी का एटीएम। - फोटो : अमर उजाला
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12 दिनों से परेशान जनता की उम्मीदें अभी भी परवान नहीं चढ़ीं हैं। हाल यह है कि नोटबंदी के 12वें दिन भी जिले में अधिकांश एटीएम के शटर गिरे मिले। खलीलाबाद नगर में केवल एक एटीएम ही रकम की निकासी करता मिला। वहीं नगर की कृषि विकास शाखा रविवार को भी खुली। यहां पर सिर्फ उन्हीं लोगों ने लेनदेन किया जिनका बैंक में खाता था। साथ ही इसी शाखा के एटीएम ने काम किया, जिससे लोगों ने रकम की निकासी की।
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शुगर मिल चौराहे पर स्थित भारतीय स्टेट बैंक की कृषि विकास शाखा अवकाश के बाद भी रविवार को खुली रही। बैंक में जिन लोगों का खाता था, उनसे लेनदेन हुआ। जिनका खाता नहीं था, उनके नोट नहीं बदले गए। ऐसे में सुबह बैंक पर भीड़ रही, लेकिन दोपहर बाद भीड़ काफी कम हो गई। इस बैंक का एटीएम भी चालू रहा, जहां सुबह से ही लोगों की भारी भीड़ लगी रही।

स्थिति यह रही कि लोगों को एटीएम से निकासी के लिए दो से तीन घंटे लाइन में खड़ा रहना पड़ा, तब कही जाकर उन्हें रुपये मिल सके। शहर के स्टेट बैंक की मुख्य शाखा, विकास भवन स्थित स्टेट बैंक की शाखा, एचडीएफसी, एक्सिस बैंक, बैंक आफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक, ओरियंटल बैंक आफ कामर्स, इंडियन बैंक, यूनियन बैंक, आईसीआईसीआई, इलाहाबाद बैंक सहित अन्य बैंकों के एटीएम का शटर नहीं उठा, जिसके कारण एटीएम पर पहुंचने वालों को निराश होकर लौटना पड़ा। स्टेट बैंक की मुख्य शाखा के एटीएम पर पहुंचे दिनेश कुमार, दिलीप कुमार ने बताया कि सुबह ही यहां आ गए थे, लेकिन एटीएम न खुलने के कारण धन की निकासी नहीं कर सके। 
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बखिरा प्रतिनिधि के अनुसार, कस्बे में तीन बैंकों की शाखा है। जिसमें से दो बैंकों के एटीएम हैं। ये भी लोगों के काम के साबित नहीं हो रहे हैं। भले ही शनिवार का दिन बुजुर्गों के लिए निर्धारित था, लेकिन लोगों ने बाउचर न देने का आरोप मढ़ा। रामदेव, कृपाशंकर, शिवकुमार, रामदयाल, रमेश, रीता, शाहबानो, शबनम, किशोरी, ललिता ने बताया कि एटीएम लगातार 12 दिनों से बंद है। 
दोनों शाखाओं के एटीएम नोटबंदी के बाद से पूरी तरह से बंद है। इससे लोगों की मुसीबत ज्यादा ही बढ़ गई है। लोगों ने बताया छोटी करेंसी की कमी से घर में सब्जी व किराना संबंधी सामान लाना   मुश्किल हो गया है। बैंक से मिले दो हजार के नोट बाजार में फुटकर के अभाव में बेमतलब साबित हो      रहे हैं।
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