संतकबीरनगर। जन साहित्यिक मंच के तत्वावधान में रविवार को एक स्कूल में 141वीं मासिक कवि गोष्ठी आयोजित की गई। इसमें वरिष्ठ शायर ओम प्रकाश गौतम ने अपनी रचना ‘एक से बढ़कर एक फूल खिले हैं गुलशन में, मगर रातरानी को ही तुम रात की रानी लिखना’ सुनाकर वावाही लूटी।
वहीं मजहर खलीलाबादी ने ‘तुझको रूठे हुए तो जमाना हुआ, आज कैसे तेरा मुस्कुराना हुआ’ सुनाकर बदलते रिश्तों की ओर इशारा किया। रचनाकार कैलाश चंद्र दूबे चंचल ने ‘आदमी से बात अपनी कहां, दर्द की जज्बात अपनी मत कहो’ सुनाकर समा बाधा। इसके अलावा राधेश्याम मिश्र ‘श्याम ने जब मुझे अब्रे गम ने घेर लिया, मयकदे जा के मयकशी कर ली’ सुनाई।
राजेंद्र बहादुर हंस ने नेता जी चाहें रुके न घोटाला, चलता रहे देश में घाला- माला। सुनाकर नेताओं के कृत्यों पर प्रकाश डाला। ज्योति सिंह अहसास ने अश्रु अविरल हो जहां पर वेदना हो, शून्य अपनों की जहां संवेदना हो, सत्य अर्थों में मानव नहीं है... सुनाकर मानवता को बचाने की अपील की। पवन सबा ने ‘दिल की दहलीज पे रखते थे जो उल्फत के चराग, हो गए गुम वो अंधेरों की मिटाने वाले’ सुनाई। वरिष्ठ रचनाका छबिराज राज ने मगहर है तपोभूमि घुम्मकड कबीर की, काशी है जन्मभूमि उस फक्कड़ फकीर की... सुनाई।