संतकबीरनगर। होली के त्योहार को लेकर बच्चों व बुजुर्गों में उत्साह बना हुआ है। बाजार अनेक प्रकार के रंगों और होली के उत्पाद से सज चुके हैं। व्यापारी अपने उत्पादों को बेचने के लिए ग्राहकों के लिए लुभावनी छूट दे रहे हैं। लेकिन, खुशियों भरे त्योहार में जरा सी असावधानी और छूट का लालच आपकी सूरत बिगाड़ सकता है।
होली पर्व को लेकर बाजार में अबीर-गुलाल के अलावा केमिकल से बने रंगों की भरमार है। शहर के गोला बाजार, मुखलिसपुर तिराहा, बैंक चौराहा, समय जी स्थान, मेंहदावल बाईपास आदि अधिकतर दुकानों में रंग बिक रहे हैं। 40 रुपये से लगायत यह रंग 100 रुपये में 100 ग्राम तक उपलब्ध है। इन रंगों के चेहरे पर लगते ही त्वचा पर जलन होने लगती है। पक्का रंग होने के कारण यह आसानी से नहीं निकलता है। इस कारण कई लोगों के चेहरे पर दाने और चेहरा भी खराब हो सकता है। कई घुलने वाले रंगों में रेत की मिलावट होती है, जिससे स्कीन खराब होने की पूरी संभावनाएं बनी हुई है। ऐसे में रंग खरीदते समय सावधानी बरते। जहां तक हो सके अबीर का ही प्रयोग करें। शहर के बंजरिया निवासी विनोद कुमार, नीरज त्रिपाठी, गोला बाजार निवासी सूरज मिश्र आदि का कहना है कि होली में अबीर का महत्व होता है। रंगों से वे लोग बचते है। जहां तक होता है अबीर का ही प्रयोग करते है और बच्चों को भी इसे लगाने के लिए कहते है।
मिलावटी रंग से त्वचा संबंधी हो सकती हैं बीमारियां
जिला अस्पताल के चर्म रोग विशेष डॉ. एसडी गौतम ने लोगाें को हर्बल गुलाल से ही होली खेलने की सलाह दी है और कहा है कि अगर गुलाल में किसी प्रकार की रगड़ या फिर कड़कपन दिखे तो उसका इस्तेमाल नहीं करें। रसायनिक रंग से त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है। श्वास एवं एलर्जी की बीमारी हो सकती है। बाजार में बिकने वाले हरे रंग में तांबा, काले रंग में नाइट्रेट ऑक्साइड, परपिल रंग में क्रोमाइड, सिल्वर कलर में एल्युमिनियम ब्रोमाइड, लाल रंग मारकरी सल्फेट रसायनों से बनता है। यह सभी रसायनिक रंग त्वचा पर जलन खुजली, दाने, एलर्जी, श्वास की तकलीफ उत्पन्न कर सकते हैं जो आपकी होली को बदरंग कर सकते हैं।