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दो दिवसीय मगहर महोत्सव का समापन

Fri, 29 Jun 2018 11:19 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला संतकबीरनगर
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मगहर कबीरचौरा परिसर में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। - फोटो : अमर उजाला
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मगहर। सद्गुरु कबीर के 620वें प्राकट्य दिवस पर गुरुवार और शुक्रवार को कबीरचौरा परिसर में मगहर महोत्सव का आयोजन किया गया। संस्कृति मंत्रालय की ओर से आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में कलाकारों ने कबीर के निर्गुण, सूफी संगीत, भजन, भाव नृत्य के अलावा विभिन्न प्रांतों के परंपरागत लोकगीतों व नृत्यों की प्रस्तुति की। शाम से देर रात तक बही इस सुर सरिता में दर्शक-श्रोता गोते लगाते रहे। 
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शुक्रवार को कार्यक्रम के दूसरे दिन बस्ती से आईं गायिका रंजना अग्रहरि ने कबीर के सूफी गीत ‘कइसे दिन कटिए जतन बताए जहिओ’ की प्रस्तुति कर खूब वाहवाही लूटी। उसके बाद निर्गुण ‘सइयां निकस गए, मैं ना लड़ी थी’ सुनाकर लोगों को भावविभोर कर दिया। गोरखपुर से आए लोक गायक राकेश उपाध्याय ने कबीर का निर्गुण ‘झुलनी का रंग सांचा हमार पिया’ को सुनाया तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूूंज उठा। गायक राकेश ने कजरी ‘गोरी भूल गई फूलवा हजार में’ सुनाया तो लोगों को सावन की याद आ गई और लोग भी थिरक उठे। प. बंगाल के शांति निकेतन से आए  कलाकारों ने रविदास की अगुवाई में बाउल परंपरा का गायन किया। इससे पहले अजहर आलम द्वारा निर्देशित ‘कबीरा खड़ा बाजार में’ का बेजोड़ मंचन किया गया।
इससे पहले गुरुवार की रात उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र इलाहाबाद के माध्यम से आयोजित कार्यक्रम में गायिका विधि शर्मा ने ‘अंतर्मन की आवाज’ शीर्षक शृंखला में उम्दा संगीत की प्रस्तुति की। विधि शर्मा ने चदरिया झीनी रे झीनी, कहत कबीर, घूंघट के पट खोल रे, जैसे कबीर के भजन सुनाकर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। इसके अलावा देश के विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों ने सामूहिक नृत्य के जरिए उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, गुजरात, मध्य प्रदेश और मणिपुर की कला-संस्कृति की झलक प्रस्तुत कर दर्शकों-श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का संचालन शैलेंद्र सिंह ने किया। इस अवसर पर उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र इलाहाबाद के निदेशक इंद्रजीत ग्रोवर, संत केशव दास, राम लखन दास उर्फ लाल बाबा, संत अरविंद दास, संत विनोद दास, मेराज खान, सजन लाल, अरविंद दास के अलावा काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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