-चंगेरा-मंगेरा और उमिला गांव का किया भौतिक सत्यापन
- सेमरियावां ब्लाॅक के 29 गांव में चल रही है जांच, पहले दिन नहीं मिला था अभिलेख
संतकबीरनगर/ सेमरियावां। प्रशासकीय प्रभार के दौरान सेमरियावां ब्लाॅक के 29 ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर 1.29 करोड़ रुपये के हुए फर्जी भुगतान के मामले में लोकायुक्त की जांच दूसरे दिन भी हुई। टीम ने दो ग्राम पंचायतों में कराए गए कार्यों की जांच की। अभिलेखों से मिलान किया। टीम ने शनिवार को फिर जांच की बात कही है।
एसडीएम सदर शैलेश दुबे के नेतृत्व में टीम ने चंगेरा-मंगेरा, उमिला गांव में पहुंचकर विकास कार्यों में अनियमितता की जांच की। शनिवार को फिर टीम जांच करेगी। अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है। इस दौरान सहायक अभियंता नलकूप खंड अमरनाथ, सहायक अभियोजन अधिकारी जय सिंह, अवर अभियंता नलकूप खंड अभय द्विवेदी, पूर्व में तैनात ग्राम विकास अधिकारी शिवेंद्र कन्नौजिया, टीए उदयभान शर्मा, केडी पांन्य, ग्राम पंचायत अधिकारी योगेंद्र गौड़, ग्राम पंचायत अधिकारी शिव मूरत मौर्य, राजस्व निरीक्षक गिरजा शंकर चौधरी, हल्का लेखपाल इंद्रेश यादव समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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क्या है मामला
सेमरियावां निवासी सलीम उमर ने लोकायुक्त कार्यालय में परिवाद दाखिल कर आरोप लगाया था किनियुक्त प्रशासक सहायक विकास अधिकारी पंचायत के जरिए पत्रावली पर हस्ताक्षर कर एक जनवरी 2021 से 31 मई 2021 तक बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता की गई है। ग्राम पंचायत सचिव और नियुक्त प्रशासक एडीओ पंचायत के संयुक्त डोंगल से तमाम ग्राम पंचायतों में राज्य वित्त एवं 15वें वित्त से बिना टेंडर निकाले गांव में हैंडपंप मरम्मत, स्ट्रीट लाइट, नाली, इंटरलाॅकिंग, स्कूल की मरम्मत के नाम पर फर्जी भुगतान किया गया है। तत्कालीन एडीओ पंचायत ने अपने चहेते फर्मों को लाभ पहुंचाया। हालांकि इस मामले में दो पूर्व मुख्य विकास अधिकारी, पूर्व जिला पंचायत राज अधिकारी तथा जेई समेत तीन सचिवों पर आरोप लगा है।