नगर पंचायत हरिहरपुर में श्रीमद्भागवत कथा सुनाते आचार्य देवव्रत जी महराज
हरिहरपुर। नगर पंचायत हरिहरपुर में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन आचार्य देवव्रत ने कहा कि भगवत कथा से भक्ति और भगवान की प्राप्ति होती है। माघ महीने में कथा सुनने से भगवत कृपा प्राप्त होती है।
उन्होंने कहा कि भागवत कथा अर्पण, तर्पण और समर्पण का भाव मन में जगाती है। जब व्यक्ति के भीतर समर्पण का भाव आ जाता है तब वह ध्रुव और प्रहलाद की तरह साक्षात प्रभु के दर्शन पा लेता है। उन्होंने कहा कि पुण्य के फल से भी भगवत कथा सुनने को नहीं मिलता क्योंकि देवताओं के पास पुण्य की कोई कमी नहीं है। श्रीमद्भागवत कथा सुनने का अवसर बड़े भाग्य से मिलता है।
उन्होंने कहा कि भगवान और भक्ति की प्राप्ति भाग्य से नहीं बल्कि भागवत कथा से होती है। व्यास जी कहते हैं कि भगवत कथा भगवान की प्राप्ति कराती है। परमात्म बल ऐसा बल है जो भगवत कृपा से ही प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा प्रसाद का एक रूप है। उन्होंने प्रसाद शब्द की महिमा बताई और कहा कि यह कथा प्रभु का प्रसाद है। कोई व्यक्ति कथा तभी सुन पाता है उस पर ईश्वर की कृपा हो। भगवत कथा रूपी संगम में कितने भी गहरे चले जाएं डूबने का डर नहीं होता। कथा का यह संगम भाव के सागर डुबो देता है। जिसमें पहले चरण में भक्ति और दूसरे चरण में भगवान की प्राप्ति होती है। उन्होंने श्रीमद् का अर्थ बताते हुए कहा कि श्री शब्द का मतलब राधा जी से है। वास्तव में यह श्रीमत है लेकिन बाद में भागवत शब्द आने के चलते श्रीमद् कहा जाता है। इस मौके पर आशुतोष पांडेय, शक्ति कुमार पांडेय, अनिमेश पांडेय आदि मौजूद रहे।