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Sant Kabir Nagar News: सरकार के खाते में जमीन, ध्वस्त हो सकता है मदरसा

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संवाद न्यूज एजेंसी
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संतकबीरनगर। खलीलाबाद शहर के मोतीनगर स्थित मदरसा कुल्लियातुल बनातिर रजविया प्रकरण में एसडीएम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। करीब ढाई महीने चली सुनवाई के बाद एसडीएम हृदयराम तिवारी की अदालत ने मदरसे के नाम दर्ज 640 वर्गमीटर जमीन के बैनामे को रद्द कर दिया।
न्यायालय ने भूमि को राज्य सरकार में निहित घोषित करते हुए राजस्व अभिलेखों से संबंधित संस्था का नाम हटाकर सरकारी भूमि के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट के इस फैसले से मदरसे के अवैध निर्माण के ध्वस्तीकरण का रास्ता भी साफ होने की संभावना है।
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मामला वर्ष 2014 में मोतीनगर स्थित गाटा संख्या 154 की 640 वर्गमीटर कृषि भूमि के बैनामे से जुड़ा है। प्रकरण के अनुसार मदरसे के मुख्य सरपरस्त मौलाना शमशुल हुदा खान ने 19 दिसंबर 2013 को ब्रिटेन की नागरिकता हासिल की। इसके बाद दो सितंबर 2014 को उसकी सरपरस्ती वाली कुल्लियातुल बनातिर रजविया एजूकेशनल एंड वेलफेयर सोसायटी के नाम उक्त भूमि का बैनामा कराया गया।
आरोप है कि ब्रिटिश नागरिक होने के बावजूद भूमि खरीदने के लिए राज्य सरकार से आवश्यक अनुमति नहीं ली गई।मामले में 12 फरवरी 2024 को जिलाधिकारी न्यायालय ने नियमों के उल्लंघन को आधार मानते हुए भूमि को राज्य सरकार में निहित करने का आदेश दिया। इसके बाद प्रकरण को लेकर प्रशासनिक और न्यायिक स्तर पर कार्रवाई आगे बढ़ी।
नवंबर 2025 में डीएम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में एसडीएम खलीलाबाद ने पुलिस बल की मौजूदगी में मदरसा भवन को सील करा दिया।
14 नवंबर 2025 को मंडलायुक्त बस्ती कोर्ट में सुनवाई के बाद डीएम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 104 के तहत बैनामे को शून्य मानते हुए भूमि को दोबारा सरकारी खाते में दर्ज करने का आदेश दिया।
जनवरी में निलंबित हुई थी मदरसे की मान्यता, छात्राओं का कराया गया था स्थानांतरण ः मदरसे पर प्रशासनिक कार्रवाई के साथ ही उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद ने 13 जनवरी 2026 को उसकी मान्यता निलंबित कर दी। मदरसे में पंजीकृत 336 छात्राओं का डेटा दूसरे मदरसों में स्थानांतरित कराया गया। इसके बाद अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की जांच में यू-डायस पोर्टल पर छात्राओं के पंजीकरण को लेकर भी अंतर सामने आया। 22 फरवरी को हुई जांच में प्रबंधन द्वारा बताई गई 336 छात्राओं के मुकाबले 213 छात्राओं का पंजीकरण सही पाया गया।
हाईकोर्ट में लंबित है मौलाना की याचिका ः मामले में ब्रिटिश नागरिकता प्राप्त मौलाना शमशुल हुदा खान की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है।
ऐसे में एसडीएम कोर्ट के ताजा आदेश का आगे की न्यायिक प्रक्रिया और मदरसे से जुड़े निर्माण के मामले पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। प्रशासनिक स्तर पर अब राजस्व अभिलेखों में भूमि को सरकारी खाते में दर्ज किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
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हाईकोर्ट के निर्देश पर दोबारा शुरू हुई सुनवाई ःहाईकोर्ट के निर्देश के बाद 26 मई को एसडीएम कोर्ट में वाद दर्ज किया गया। हल्का लेखपाल ने मौके और भूमि से संबंधित जांच कर अपनी नवीन आख्या न्यायालय में प्रस्तुत की। इसके बाद दोनों पक्षों की ओर से करीब ढाई महीने तक कानूनी बहस चली। एसडीएम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए बैनामे को गैर कानूनी माना और 640 वर्गमीटर भूमि तथा उस पर हुए निर्माण को राज्य सरकार की संपत्ति घोषित कर दिया।
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