विकास खंड सेमरियावां के गांव सालेहपुर में सैयद मोहम्मद अशरफ शहीद उर्फ दादा मियां के उर्स के पहले दिन नमाजे इशा तकरीरी कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस दौरान उलेमा ने इस्लाम के प्रसार में औलिया-ए-कराम के योगदान पर चर्चा करते हुए सूफी संतों को दुनिया के सामने इस्लाम की सच्ची तस्वीर पेश करने वाला बताया।
हजरत सैयद मोहम्मद हमजा अशरफ ने कहा कि इस्लाम ने समानता, भाईचारा, अमन, प्रेम व सौहार्द का संदेश दिया है। इस्लाम के इन संदेशों के प्रसार में औलिया-ए-कराम और सूफी संतों का महत्तवपूर्ण योगदान है। अल्लाह के उन नेक बंदों ने अपने अच्छे आचरण और इस्लामी संदेशों को जनसामान्य तक पहुंचाया। आगे कहा कि कुछ लोग इस्लाम से दुश्मनी का परिचय देते हुए कहते हैं कि यह धर्म पूरी दुनिया में तलवार के जोर पर फैला। ऐसे लोग सूफी संतों के योगदान को नजरअंदाज करते हुए तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं।
उन्होंने कहा कि इस्लाम का अर्थ ही शांति है, कुछ लोग इस्लाम का नाम लेकर दुनियां में अशांति और हिंसा फैलाते हैं ऐसे लोग इस्लाम और मानवता के दुश्मन हैं। उन्होंने कहा कि दादा मियां इस्लाम के संदेशों को लोगों तक पहुंचाने के लिए 14वीं शताब्दी में तप्पा उजियार क्षेत्र में आये थे। उनके योगदान से इस क्षेत्र में शिक्षा का प्रसार हुआ और लोग शांति और सौहार्द के रास्ते पर आए।
मशहूर आलिम सैयद कमाल अशरफ ने कहा कि इस्लाम के पैरोकारों ने सूफी-संतों के रास्ते को अपनाया तो सदियों से इस्लामी तालीम की रोशनी से मानवता का कल्याण होता रहा। आज सूफी संतों के संदेशों को छोड़ कर लोग पेरशान हैं और अशांति से दुनिया कराह रही है। उन्होंने कहा कि आज भी दुनिया में प्रेम और भाईचारा के प्रसार के लिए सूफी संतों के पैरोकारों को प्रोत्साहन मिलना चाहिए।
काजी मोहम्मद जीशान ने भी लोगों को संबोधित किया और कारी मोहम्मद तैश ने नाते पाक प्रस्तुत किया। इस अवसर पर सैयद रफअत हुसैन, सैयद आमिर हुसैन, सैयद मकसूद हुसैन, मतीउल हक, अबू सूफियान, मास्टर अबुल आला, सैयद मोईनुद्दीन अशरफ आदि उपस्थित रहे।