महुली कस्बे में चल रही श्रीमद्भागवत कथा
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संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। महुली कस्बे में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में बृहस्पतिवार को आचार्य धरणीधर महाराज ने भगवान के चौबीस अवतारों की कथा सुनाई। समुद्र मंथन के वर्णन के दौरान उन्होंने कहा कि यह संसार भगवान का सुंदर बगीचा है। यहां चौरासी लाख योनियों के रूप में भिन्न-भिन्न प्रकार के फूल खिले हुए हैं। जब कोई इस बगीचे को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है तो भगवान उसका संहार करता है।
उन्होंने समुद्र मंथन की कथा में कहा कि मानव हृदय ही संसार सागर है। मनुष्य के अच्छे और बुरे विचार ही देवता और दानव के द्वारा किया जाने वाला मंथन है। कभी हमारे अंदर अच्छे विचारों का मंथन चलता रहता है और कभी हमारे ही अंदर बुरे विचारों का मंथन चलता है।
आचार्य धरणीधर ने बताया कि जिसके अंदर का दानव जीत गया, उसका जीवन दुखी, परेशान और कष्ट कठिनाइयों से भरा होगा। जिसके अंदर का देवता जीत गया, उसका जीवन सुखी, संतुष्ट और भगवत प्रेम से भरा हुआ होगा। इसलिए हमेशा अपने विचारों पर पैनी नजर रखिए। बुरे विचारों को अच्छे विचारों से जीतते हुए अपने मानव जीवन को सुखमय एवं आनंदमय बनाना चाहिए। बच्चों को धर्म का ज्ञान बचपन में दिया जाता है। वह जीवन भर उसका ही स्मरण करता है। ऐसे में बच्चों को धर्म व अध्यात्म का ज्ञान दिया जाना चाहिए। इस अवसर पर परशुराम मिश्र, डाॅ. रमेश चंद्र मिश्र, रामचंद्र मिश्र आदि मौजूद रहे।