फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जलसा-ए-दस्तारबंदी में 76 को उपाधि मिली

Thu, 19 May 2016 11:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला संतकबीरनगर
विज्ञापन
76 छात्रों को दस्तारबंदी के साथ ही उपाधि दी गई। - फोटो : अंबरीश‌ मिश्रा
विज्ञापन
 बुधवार की देर रात अमरडोभा स्थित दारूल उलूम अहले सुन्नत तनवीरुल इस्लाम में सत्र की समाप्ति पर 76 छात्रों को दस्तारबंदी के साथ ही उपाधि दी गई। इस मौके पर पूर्व प्रिंसिपल मोहम्मद हनीफ कादरी की याद में उर्स भी आयोजित किया गया। पूरा कार्यक्रम प्रिंसिपल मौलाना मूसा रिजवी और प्रबंधक मोहम्मद अहमद की देखरेख में संपन्न हुआ।
विज्ञापन

बतौर परीक्षक मुफ्ती शब्बीर हसन ने कहा कि अमरडोभा का यह मदरसा शैक्षिक रूप से बेहद अहम है। देश के विभिन्न स्थानों से आकर इस मदरसा में शिक्षा प्राप्त कर अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे है। अपनी शिक्षा पूरी कर चुके  छात्रों की दस्तारबंदी करते हुए आज इस मुकद्दस मौके पर सनद प्रदान किया गया। सनद पाने वाले छात्रों में फजीलत की शिक्षा पूरी करने वाले जलालुद्दीन, मो.नोमान, इश्तियाक की दस्तारबंदी के साथ ही सनद दी गई। आल्मीयत के लिए अजीजुल्लाह, मो. तौफीक, किरात के लिए कमरुद्दीन, हिसामुद्दीन और हिबज की  शिक्षा पूरी कर चुके इम्त्याज अहमद, कमाल अख्तर, मो. सकलैन, मो. शोएब को सनद मिला।
इस मौके पर उर्स में बतौर मुख्य वक्ता सैय्यद अब्दुल उर्फ चॉद बाबू ने  कहा दुनिया में तालीम के बगैर किसी का रूतबा नहीं है। मनुष्य को तालीम का  उपयोग एक दूसरे की मदद के लिए करना चाहिए। विकास का रास्ता भी इसी से खुलता है। इसके लिए मदरसा तनवीरूल इस्लाम का एक अहम मुकाम है, जो सतत इस दिशा में काम कर रहा है। संचालन मौलाना  शब्बीर अहमद ने किया। इस अवसर पर अल्लामॉ सईद अख्तर, मौलाना  इमाम अली, मुफ्ती शमसाद अहमद, मौलाना मुखतारुल हसन आदि मौजूद रहे। 
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें