पार्टी समर्थित प्रत्याशी के पक्ष में सोमवार को जनसभा करने पहुंचे बसपा के पूर्व मंत्री, जोनल कोआर्डिनेटर और जिलाध्यक्ष को दूसरे प्रत्याशी के समर्थकों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ी।
प्रत्याशी समर्थकों ने जिलाध्यक्ष समेत पार्टी नेताओं के काफिले को रोक लिया और जमकर नारेबाजी की। जिलाध्यक्ष पर पैसे लेने के बाद भी पार्टी का समर्थन न दिलाने का आरोप लगा रहे प्रत्याशी समर्थकों से तीखी नोक-झोंक भी हुई।
करीब एक घंटे तक रामजानकी मार्ग पर हंगामा होता रहा। बाद में बसपा के ही कुछ नेताओं ने बीच बचाव कर मामले को शांत कराया।
जिला पंचायत सदस्य पद का चुनाव लड़ रहीं मीरा देवी के पति धर्मेंद्र का आरोप था कि बसपा का समर्थन देने की बात कह कर जिलाध्यक्ष झिनकान प्रसाद ने उससे तीन माह पहले ही दो लाख रुपये लिए थे।
बाद में दूसरे प्रत्याशी को पार्टी का समर्थन दिला दिया। इसी प्रत्याशी के पक्ष में सोमवार को पूर्व मंत्री लालजी वर्मा, कोआर्डिनेटर रामसूरत चौधरी व जिलाध्यक्ष झिनकान प्रसाद जनसभा में पहुंचे।
सभा से लौटते समय मीरा देवी के समर्थकों ने रामजानकी मार्ग पर पार्टी नेताओं के काफिले को रोक लिया। नारेबाजी करते हुए जिलाध्यक्ष से अपने पैसे की मांग करने लगे। करीब एक घंटे तक हंगामा चलता रहा।
इस दौरान बसपा जिलाध्यक्ष अपनी गाड़ी का दरवाजा और शीशा बंद करके अंदर ही बैठे रहे। बाद में पार्टी के ही कुछ नेताओं के बीच-बचाव के बाद नाराज लोग शांत हुए और काफिला आगे बढ़ पाया।
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आरोप निराधार, नेतृत्व को देंगे जानकारी
बसपा जिलाध्यक्ष झिनकान प्रसाद ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना था कि धर्मेंद्र कुमार ने अपनी पत्नी को पार्टी का समर्थन देने का दबाव बनाया था, लेकिन कामयाबी न मिलने की खीझ में पैसे लेने का आरोप मढ़ा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पार्टी का बैनर, झंडा लगा कर प्रचार करना, पार्टी मुखिया के निर्देशों का उल्लंघन है। पार्टी विरोधी गतिविधि अपनाने से रोकने के कारण ही उन पर आरोप लगाए जा रहे हैं। इस बारे में पार्टी नेतृत्व को अवगत कराया जाएगा। उनके निर्देशानुसार कदम उठाया जाएगा।
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