संतकबीरनगर। जिले में औद्योगिक विकास को रफ्तार नहीं मिल पा रही है। यह स्थिति तब है जबकि शासन स्तर से इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही इंवेस्टर्स समिट आयोजित कर निवेश का प्रयास हो रहा है। वर्ष 2024 में हुए इंवेस्टर्स समिट में 102 औद्योगिक घरानों ने 4754 करोड़ का निवेश प्रस्ताव दिया था, लेकिन सिर्फ 54 लोगों ने इसमें रूचि दिखाई और 1449 करोड़ का निवेश आ सका। इसके पीछे कहीं जमीन का पेंच है तो कहीं फंड उपलब्ध होने में आ रही समस्या बनी हुई है।
औद्योगिक विकास को लेकर शासन स्तर से तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। पिछले इंवेस्टर्स समिट में जो प्रस्ताव आए, उनमें टेक्सटाइल्स, पशु आहार, खाद्य प्रसंस्करण, मशीनरी उद्योग आदि शामिल हैं। इन उद्योगों के जरिए 12598 रोजगार सृजन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन काफी प्रयास के बाद भी मात्र 4052 लोगों को रोजगार मिल सका। इसमें से अधिकतर परियोजनाओं पर कार्य पूर्ण हो गया है, लेकिन पूर्व में चल रही 78 औद्योगिक इकाइयां बंद हो गई है। यह बात शासन के निर्देश पर प्रशासन द्वारा कराए गए सर्वे में आया है।
सर्वे में यह तथ्य प्रकाश में आया कि जिले के खलीलाबाद में कुल आवंटियों की संख्या 282 हैं। इनमें से 107 इकाइयां ही वर्तमान में चल रही है। 78 औद्योगिक इकाइयां बंद हो चुकी है। 37 लोगों ने आवंटित भूखंड में आवास बना लिया है। इसके साथ मूल प्रोजेक्ट से अलग प्रोजेक्ट पर काम करने वाली इकाइयों की संख्या 14 है। यही नहीं 12 आवंटित भूखंड का उपयोग गोदाम और किराए के रूप में कर रहे हैं।
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बिजली की समस्या भी बन रही बाधा
औद्योगिक विकास में बिजली की समस्या भी बाधा बनी हुई है। उद्योगों को भरपूर बिजली चाहिए, लेकिन बार-बार बिजली की ट्रिपिंग के कारण मशीनें बंद हो जाती हैं। जिसे पुन: चालू करने में जहां तैयार माल खराब होने की स्थिति बन जाती है, इससे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। हालांकि इसके लिए औद्योगिक क्षेत्र में एक नया फीडर स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई कार्य नहीं हो सका है।
औद्योगिक क्षेत्र के विकास में जमीन की उपलब्धता और फंड की समस्या आड़े आती रही हैं। जिसके कारण औद्योगिक विकास को गति नहीं मिल पा रही है। बिजली का संकट भी बना रहता है। इस दिशा में कदम उठाया जाना चाहिए।
-अरविंद पाठक, अध्यक्ष इंडस्ट्रियल एसोसिएशन
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शासन की नीति के तहत औद्योगिक विकास के लिए कदम उठाए जाने की जरूरत है, लेकिन इसमें बैंकों से ऋण और जमीन की समस्या आड़े आती हैं। इस दिशा में ठोस पहल करने की जरूरत है। इसके साथ ही नया फीडर स्थापित किया जाना चाहिए, ताकि बिजली का संकट दूर हो सके।
-कालीशंकर, उद्यमी
कोट
औद्योगिक विकास के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। उद्योग बंधु की बैठक में ऋण आदि के मामले उठाए जाते हैं, जिसका निस्तारण कराया जा रहा है। जमीन की उपलब्धता के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। जो इकाइयां बंद हैं, उन्हें चलाने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं।
-राजकुमार शर्मा, उपायुक्त उद्योग