संतकबीरनगर। जन साहित्यिक मंच के तत्वावधान में रविवार को हीरालाल राम निवास इंटर कॉलेज खलीलाबाद के सभाकक्ष में मासिक कवि गोष्ठी हुई। बतौर मुख्य अतिथि राजेंद्र बहादुर सिंह हंस ने अपनी रचना ...रोशनी अपने घर कह बढ़ा लीजिए, खून मेरा दीये में जला लीजिए...सुनाकर गोष्ठी की शुरुआत की।
मंच के महामंत्री सुरेश यादव ने ...मीठा जहर दिया जा रहा धर्म नाम की घुट्टी में, संविधान अब कैद हो गया राजनीति की मुट्ठी में... सुनाकर जनता को जागरूक किया। राधेश्याम मिश्र श्याम ने ...उड़ने पर जब श्याम मेरे पाबंदी है, कैसे कहूं मैं इक आजाद परिंदा हूं... सुनाकर वाहवाही बटोरी। ओम प्रकाश गौतम ने ...ख्वाब जन्नत के दिखाएं सिर्फ नारे रह गए, हम बेचारे थे बेचारे ही रह गए... सुनाकर नेताओं द्वारा दिखाए गए सपनों की ओर इशारा किया।
सूरज कुंवर सरस ने ...सुबह की धूप मुस्कराई है, सर्दियों में बहार आई है... सुनाकर सर्दियों में सुबह की धूप का महत्व समझाया। राजेश मृदुल धर ने ...ना बहियां न देहियां संभारल बने, सोझा-सोझा न पउवां ई डारल बने... सुनाकर माहौल को खुशनुमा बना दिया। छविराज राज ने ...विद्या अपार प्रदान कियो, गुरुदेव प्रभु मेरे भाग्य विधाता... सुनाकर गुरु की महिमा को बताया।
अध्यक्षता कर रहे सरदार हरिभजन सिंह भजन ने ...रोवो न बेटा हंसो देख मुझको, मैं शीश की भेंट चढ़ाने चला... सुनाकर गुरु तेग बहादुर की शहादत को याद किया। हामिद खलीलाबादी ने ...कत्लो गारत के हैं हर सक्त भड़कते शोले, ऐसे माहौल में आसूदगी कैसे आए... सुनाकर गोष्ठी को ऊंचाई प्रदान की। युवा कवि देवानंद बच्चन ने मैं कहां से चला आ रहा गया मैं कहां, मैं सफर ढूंढ़ता हूं, यहां से वहां, सुनाया जिसे सराहा गया।
गोष्ठी में विपिन चंद्र जोशी, शिवा पांडेय, प्रभात साहनी, अविनाश पांडेय आदि ने भी काव्य पाठ किया। इस अवसर पर नवाब अली, संजय कुमार आदि मौजूद रहे।