पंचायत चुनाव भले ही पार्टी के सिंबल पर न हो रहे हो, लेकिन सभी राजनीतिक दलों के दिग्गजों ने चुनाव से अपनी प्रतिष्ठा जोड़ ली है।
पार्टी के दिग्गजों की नजर अधिक से अधिक जिला पंचायत सदस्य सीट जिताकर जहां जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर पार्टी का दबदबा कायम करना है, वहीं ब्लॉक प्रमुख पदों पर काबिज होने की मंशा भी है।
इसमें उन्हें कितनी सफलता मिलेगी यह तो समय के गर्भ में है, लेकिन दिग्गजों के चुनाव में उतरने से सियासत जरूर गरमा गई है।
वैसे तो पंचायत चुनाव के दो चरण का चुनाव संपंन हो चुका है, लेकिन अब शेष बचे दो चरणों के चुनाव को लेकर सियासी पार्टियां पूरी तरह से सक्रिय हो गई है। सूबे की सरकार में जिले के रहने वाले स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री शंखलाल मांझी की पत्नी अंजनी मांझी चौथे चरण में भाग्य आजमा रही है।
ऐसे में राज्यमंत्री की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। हालांकि अभी तक खुद मंत्री प्रचार में नहीं उतरे हैं, लेकिन देर सबेर उनके प्रचार में उतरने की संभावना है।
वहीं सपा के पूर्व सांसद भालचंद यादव अपने बेट व पुत्रवधू को अलग-अलग सीटों से चुनाव लड़ा रहे है। इनके पक्ष में खेल राज्यमंत्री राम करन आर्य मुखलिसपुर में सभा को संबोधित कर चुके हैं,जबकि कैबिनेट मंत्री राजकिशोर सिंह उनके गांव में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर चुके है।
यहां मतदान तीसरे चरण में है। इसी चरण में सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष इंजीनियर सुरेंद्र यादव अपने भाई के लिए तो पूर्व महासचिव नित्यानंद यादव अपनी पत्नी के लिए प्रतिष्ठा लगा दी है। हालांकि इस चरण में दिग्गजों के सामने सपा के ही कार्यकर्ता मैदान में डटकर समीकरण बिगाड़ने का काम कर रहे हैं।
सपा के पूर्व विधायक अब्दुल कलाम भी चुनावी समर में अपने चहेते प्रत्याशियों के पक्ष में प्रतिष्ठा लगाई है। जहां तक भाजपा का सवाल है तो सांसद शरद त्रिपाठी पार्टी के समर्थित प्रत्याशियों के समर्थन में सभाएं करते देखे जा रहे हैं। इसके साथ ही भाजपा ने संचालन समिति बनाई हे, जिसमें पूर्व सांसद अष्टभुजा शुक्ल, पूर्व सांसद इंद्रजीत मिश्र सहित पार्टी के दिग्गज नेता चुनाव प्रचार की कमान संभाले हुए हैं।
बसपा के जोनल कोआर्डीनेटर राम सूरत चौधरी के साथ ही पार्टी के जिलाध्यक्ष झिनकान प्रसाद व विधान सभा क्षेत्र खलीलाबाद के प्रत्याशी मोहम्मद आजम सिद्दीकी भी बसपा के घोषित प्रत्याशियों के लिए पूरी ताकत लगा दी है। विधायक डॉक्टर अयूब भी पार्टी के प्रत्याशियों के समर्थन में उतर गए हैं।
जो दिग्गज चुनाव में नहीं है, उनके समर्थित प्रत्याशी उनकी फोटो लगे पोस्टरों के जरिए मतदाताओं को समझाने में लगे हैं। दरअसल दिग्गजों का चुनाव अभियान में इस तरह उतरना सिर्फ जिला पंचायत सदस्य व क्षेत्र पंचायत सदस्य का चुनाव जीतना ही नहीं है बल्कि सभी की नजर जिलापंचायत अध्यक्ष व ब्लॉक प्रमुख पदों पर टिकी है।
दिग्गजों का पूरा प्रयास है कि किसी तरह सदस्य सीट हासिल किया जाए, ताकि अध्यक्ष व प्रमुख चुनाव में दिक्कतों का सामना न करना पड़ा। अब ऊट किस करवट बैठेगा यह तो परिणाम आने के बाद पता चलेगा, लेकिन दिग्गजों की सक्रियता ने सियासी पारा चढ़ा दिया है।