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छह साल में सिर्फ 116 रजिस्टर्ड

Fri, 17 Mar 2017 11:50 PM IST
sant kabir nagar
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संतकबीरनगर। 
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हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के तहत रजिस्ट्री कार्यालय में दंपति को रजिस्ट्रेशन कराने की व्यवस्था है। मगर जिले में जागरूकता के अभाव में विवाह पंजीयन का बुरा हाल है। छह साल में सिर्फ 116 दंपति ने ही रजिस्ट्रेशन कराया। यदि यही हाल रहा और वैधानिक रूप से अपनी पत्नी को पत्नी साबित करने की नौबत आई तो लोगों को महंगा पड़ सकता है।
हिंदू विवाह अधिनियम में उन विवाहों का रजिस्ट्रेशन रजिस्ट्री कार्यालय से किए जाने का प्रावधान है, जो अस्तित्व में हों। हिंदू मैरेज एक्ट 1955 के तहत इसे सर्वोच्च न्यायालय ने भी वैध करार देते हुए रजिस्ट्रेशन कराए जाने को न्यायोचित ठहराया है। विवाह के रजिस्ट्रेशन के लिए कुछ शर्ते हैं, उन शर्तों में लड़की-लड़का दोनों हिंदू होने चाहिए। दोनों बालिग होने के साथ भारतीय होने चाहिए। विवाह रजिस्ट्रेशन की जो प्रक्रिया है, उसमें बाकायदे फार्म भरना होता है। उसमें पति-पत्नी का नाम, उनका स्थायी पता, दोनों के पिता का नाम और पता, विवाह का स्थान, तिथि और विवाह संपंन कराने वाले पंडित का हस्ताक्षर अनिवार्य है। विवाह के प्रमाण के लिए आमंत्रण कार्ड, फोटोग्राफ और दंपति के निवास से संबंधित प्रमाण पत्र आवेदन के साथ संलग्न करना होता है। दंपति के तीन-तीन पासपोर्ट साइज के फोटो भी जरूरी हैं। लड़के के स्थायी निवास के क्षेत्र में आने वाले रजिस्ट्री कार्यालय में ही विवाह का रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है। पिछले एक साल से ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी प्रदान कर दी गई है। उसके बाद दंपति अपने दो गवाहों के साथ रजिस्ट्री कार्यालय पहुंच कर प्रमाण पत्र जारी करा सकते हैं। इसके अलावा यदि आधार कार्ड लिंक है तो ऑनलाइन आवेदन में फोटो और अंगूठा की प्रस्तुतीकरण की भी सुविधा दी गई है। उसमें रजिस्ट्री कार्यालय आने की जरूरत हीं नहीं पड़ेगी और वहीं से सर्टिफिकेट जेनरेट हो जाएगा।  विवाह पंजीयन के लिए शुल्क भी निधारित है। इससे काफी फायदे हैं। यदि कभी पत्नी-पत्नी का पासपोर्ट एक साथ बनवाना हुआ या फिर कभी कोई दूसरी महिला पत्नी होने का दावा करे तो विवाह पंजीयन के प्रमाण पत्र से वैधानिक पत्नी को साबित करना आसान होगा। मगर जिले में विवाह पंजीयन की स्थिति ठीक नहीं है। रजिस्ट्री कार्यालय खलीलाबाद के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2011 से लेकर अब तक सिर्फ 116 दंपतियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। उसमें अधिकतम फौजियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। रजिस्ट्रार हिंदू मैरेज सुप्रभात दूबे ने कहा कि विवाह पंजीयन बेहद लाभदायक है। लोगों को इसमें रुचि लेनी चाहिए। 
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पंजीकरण को सही ठहराया
संतकबीरनगर। 
हिंदू विवाह पंजीयन को सभी लोग सही ठहरा रहे हैं। अमर उजाला ने जब कुछ प्रबुद्ध लोगों से इस पर बातचीत की तो सभी ने इसे उचित ठहराया। एचआरपीजी कॉलेज के मुख्य नियंता डॉक्टर डीएन पांडेय ने कहा कि पारांपरिक तरीके से विवाह हो और उसके बाद पंजीयन हो तो कोई हर्ज नहीं है।  अधिवक्ता गोरखलाल श्रीवास्तव ने कहा कि विवाह पंजीकरण से परिवारों में तेजी से बढ़ रहीं अनेक दुष्प्रवृत्तियों पर रोक लगेगी। जहां महिला उत्पीड़न की बढ़ती घटनाएं और एक पत्नी के रहते दूसरा विवाह रचाने पर ब्रेक लगेगा, वहीं विवाहिता को परिवार में मनमुटाव की स्थिति में अपने को विवाहिता साबित करने में होने वाली कठिनाइयों से राहत मिलेगी। समाजसेवी आशीष छापड़िया ने कहा कि विवाह एक धार्मिक कार्य है। हर समाज का व्यक्ति अपनी परंपरा के हिसाब से ही शादी करना पसंद करेगा, वैसे पंजीकरण उचित है। एचआरपीजी कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग की शिक्षिका डॉक्टर मंजू मिश्रा ने कहा कि विवाह तो परंपरागत तरीके से हो, लेकिन विवाह के बाद पंजीकरण हो तो काफी अच्छा होगा।
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