संवाद न्यूज एजेंसी
रोसयाबाजार। पौली ब्लाॅक के भरदौलिया स्थित श्रीराम जानकी मंदिर (ठाकुर द्वारा) में चल रही भागवत कथा में कथावाचक आचार्य सत्येंद्र दास वेदांती महाराज ने ध्रुव चरित्र का प्रसंग सुनकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
उन्होंने कहा कि पुत्र हो तो ध्रुव जैसा जिसने अपने विमाता सुरुचि से अपमानित के बाद निश्चय कर लिया कि सिंहासन अथवा पिता की गोद से भी श्रेष्ठ स्थान किस तरह से पाऊं। जब विमाता सुरुचि ने ध्रुव से कहा कि तुम्हें मेरे गर्भ से पैदा होना पड़ेगा। पांच वर्ष के ध्रुव गुस्से में दौड़ते हुए अपनी मां के पास पहुंचे और पीड़ा बताई। माता ने कहा कि हे ध्रुव तुम्हारी विमाता ने ठीक ही कहा, सिंहासन क्या तुम्हें तो उससे ऊपर उठकर उस सिंहासन की चिंता करनी चाहिए जिसे आज तक देव, दानव, गन्धर्व, किन्नर, ऋषि मुनी तक नहीं प्राप्त कर सके।
माता सुनीता के बताए हुए रास्ते पर चलकर जब ध्रुव जंगल में अपनी साधना स्थल पर पहुंचे तो नारद के द्वारा दिया गया गुरु दीक्षा मंत्र का जप किया। ध्रुव की तपस्या का परिणाम निकला की ध्रुव आज भी ध्रुव तारा के रूप में दिखाई देते है। भागवत कथा पश्चात मंदिर पुजारी विपिन कुमार ने आरती की।
इस मौके पर ऊषा पांडेय, प्रेमचंद पांडेय, वैदेही शरण, पंडित कृपा शंकर पांडेय, डॉ. वीके पांडेय, प्रमोद पांडेय, प्रवीण पौरुष पांडेय, डॉ. शिवेंद्र, प्रत्यूष, काव्या, ओम प्रकाश, चंद्रमौली, मनोज, विजय पांडेय आदि मौजूद रहे।