फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sant Kabir Nagar News: जन्म के बाद बच्चा नहीं रोया तो हो सकता है सेरेब्रल पाल्सी रोग

Sat, 29 Jun 2024 11:30 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
विज्ञापन
विज्ञापन
- जिला अस्पताल में इस रोग के रोजना चार मरीज आते हैं
विज्ञापन

- नियमित इलाज और फीजियोथेरेपी से कम की जा सकती है समस्या
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जन्म के बाद अगर बच्चा नहीं रोता है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। गर्भ में बच्चे को मां से ऑक्सीजन मिलता है। बच्चा जैसे ही मां से अलग होता है उसे मां से ऑक्सीजन मिलना बंद हो जाता है। यदि बच्चे को ऑक्सीजन नहीं मिलेगा तो ब्रेन को नुकसान पहुंचता है। ऐसी स्थिति में बच्चे को सेरेब्रल पाल्सी बीमारी होने की आशंका अधिक रहती है। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ के मुताबिक रोज सेलेब्रल पाल्सी से पीड़ित चार से पांच बच्चे इलाज के लिए आते हैं।
खलीलाबाद निवासी अवनीश चार वर्षीय पुत्री राजश्री के साथ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी पाल के पास पहुंचे। अवनीश ने बताया कि राजश्री जन्म के समय से सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित है। सरकारी और निजी चिकित्सकों से इलाज कराया लेकिन रोग ठीक नहीं हुआ। इसे चलने व बोलने में दिक्कत है। कोई बात ठीक से समझ नहीं पाती। डॉ. पाल ने दवा लिखने के साथ ही फिजियोथेरेपी की सलाह दी। बाल रोग विशेषज्ञ ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान कुशल चिकित्सक की देखरेख में प्रसव से बहुत हद तक जन्म के समय बच्चों में होने वाले सेरेब्रल पाल्सी रोग से बचा जा सकता है।
विज्ञापन

00000000000000000
क्या है सेरेब्रल पाल्सी
सेलेब्रल पाल्सी एक न्यूरोलाॅजिकल डिसऑर्डर होता है, जो बच्चों की शारीरिक गति, चलने की क्षमता को प्रभवित करता है। यह एक तरह की विकलांगता है, जिससे बच्चों को वस्तुओं को पकड़ने और चलने में परेशानी होती है। आम तौर पर यह रोग मस्तिष्क के किसी हिस्से में चोट लगने के कारण होता है। बच्चे के विकास की अवधि के दौरान यह बीमारी सामने आती है।
विज्ञापन


जन्म के समय बच्चा न रोए तो सेरेब्रल पाल्सी रोग के होने की संभावना बढ़ जाती है। बच्चे के मस्तिष्क विकास के साथ यह रोग सामने आता है। महिलाओं की गर्भावस्था के दौरान सही देखभाल और कुशल चिकित्सक की देखरेख में प्रसव से बच्चे में यह रोग होने की संभावना कम हो जाती है। रोग को पूरी तरह ठीक तो नहीं किया जा सकता है लेकिन नियमित दवा सेवन और फिजियोथेरेपी की मदद से कम जरूर किया जा सकता है।
- डॉ. आरपी पाल, बाल रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें