संतकबीरनगर। न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या एक रमेश दूबे की कोर्ट ने हत्या का प्रयास करने के आरोपी पति, पत्नी, पुत्र को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। बीएसएफ जवान धर्मराज पर आरोप था कि उसने अपने पिता, पत्नी तथा पुत्र के ललकारने पर पीड़ित ओमप्रकाश यादव के भाई व दो अन्य लोगों को अपनी लाइसेंसी बंदूक से फायर कर हत्या करने का प्रयास किया था।
कोतवाली खलीलाबाद के ग्राम बेलपोखरी निवासी ओमप्रकाश यादव ने पुलिस को प्रार्थना पत्र दिया कि पड़ोसी बेनी यादव से जमीन संबंधी रास्ते का विवाद चल रहा था। जो पंचायतन सुलझा लिया गया था। 26 अक्तूबर 2011 को समय करीब 6:45 बजे शाम उसके घर के बच्चे दिवाली मना रहे थे। अचानक धर्मराज यादव अपनी लाइसेंसी बंदूक निकाल लिए। बेनी यादव, राहुल, शांति देवी के ललकारने पर सभी लोग अपने-अपने हाथों में लाठी फरसा लेकर हमलावर हो गए।
धर्मराज यादव ने उनके भाई अनीष को जान से मारने के लिए निशाना साधकर फायर कर दिया। फायर से अनीश के पूरे शरीर में एवं चंद्र प्रकाश, इंद्रावती को भी छर्रे लगे हैं। सरकारी अस्पताल खलीलाबाद में दवा इलाज के लिए भर्ती कराया। घायल अनीस का डॉक्टरी मुआयना हुआ। पुलिस मामले में केस दर्जकर विवेचना के दौरान आरोपी धर्मराज की दोनाली बंदूक लाइसेंसी कब्जे में ली और मौके से दो खोखा कारतूस बरामद किए गए।
विवेचक ने आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। आरोपी धर्मराज यादव, पिता त्रिवेनी, पत्नी शांति देवी, पुत्र राहुल चारों आरोपियों ने आरोप से इंकार करते हुए विचारण की मांग की। अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या एक रमेश दूबे की कोर्ट ने दौरान विचारण आरोपी त्रिवेनी उर्फ बेनी यादव की मृत्यु हो गई। अभियोजन पक्ष की गवाही तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य एवं मामले में अभियोजन के बयान से तथा प्रयोगशाला रिपोर्ट से ही यह साबित हुआ कि संबंधित कारतूस जिसे विवेचक ने बरामद किया और घटना में उक्त कारतूस का प्रयोग किया वह धर्मराज के लाइसेंसी बंदूक से चलाया ही नहीं गया। अभियोजन पक्ष के घटना को साबित करने में असफल रहने पर उक्त आरोपियों को दोष मुक्तकर दिया।