संतकबीरनगर। कुआनो नदी के किनारे बने प्रजापतिपुर बरपरवा बांध पर जगह-जगह गड्ढे तो बन ही गए है, साथ ही साथ चूहों ने बांध को खोखला कर रखा है। इसके बावजूद हाल यह है कि जिम्मेदार इस बांध की तरफ देखना मुनासिब नहीं समझ रहे हैं। हालत यह है कि इस बांध से होकर 200 से अधिक वाहन रोजाना आते-जाते हैं। बांध पर जगह-जगह हुए गड्ढे इतना खतरनाक हो चुके है कि जरा सा नजर हटी तो जान जा सकती है। लोगों का कहना है कि बांध की हालत इतना जर्जर हो चुकी है कि कुआनो नदी की बाढ़ का दबाव बढ़ा तो बांध टूट सकता है और धनघटा तहसील क्षेत्र में भारी तबाही मच सकती है।
लोगों का कहना है कि वर्ष 1998 में बांध की हालत इतनी जर्जर नहीं थी, जितना इस समय है। इसके बावजूद 1998 में कुआनो नदी की बाढ़ ने पड़री गांव के पास बांध को तोड़ दी थी। जिससे 300 से अधिक गांव में बाढ़ का पानी घुस कर तबाही मचा दिया था। पड़री और कटार मिश्र गांव के पास कुआनो नदी बांध से महज 100 से 50 मीटर की दूरी पर बहती है। नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद बांध पर दबाव बनना शुरू हो जाता है। इस वर्ष जिम्मेदार बांध पर बने गड्ढों को भरने में लापरवाही बरत रहे हैं। अब जब मानसून दस्तक दे दी है तो नदियों के जलस्तर में इजाफा होना स्वभाविक है।
25 से 30 गांवों को जोड़ती है बंधे पर बनी सड़क
बंधे से होकर विकासखंड हैंसर बाजार के प्रजापतिपुर, छितौनी, रामपुर उत्तरी, माधोपुर, डेफरा, निरंजनपुर, कटार मिश्र, बरपरवा, हैंसर, अहरा, गाई बसंतपुर, हऊदवा, फुलूई, सिरसी, डिहवा, टाडा, छपिया, परसा, हैसरी, बेलौरा आदि गांव के लोग आते जाते हैं।
तमाम गांव के लोग इसी रास्ते से होकर आते जाते हैं। पिच सड़क बनने के बाद वाहनों का दबाव बांध पर बढ़ा है। बरसात होने के बाद बांध पर बने गड्ढों में पानी भर जाएगा, जो यात्रियों के लिए खतरनाक होगा।
-घनश्याम मौर्य
कल्याण पट्टी से होकर बसवारी गांव तक करीब 27 किलोमीटर की दूरी में बना यह बांध कुआनो नदी की बाढ़ से 300 से अधिक गांव को बचाता है, लेकिन करीब दो वर्ष से अधिकारी इस बांध पर ध्यान नहीं दे रहे है। जिसके कारण बांध पर जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं।
-शिवकुमार
बांध की हालत देखकर यह लगता है कि अधिकारी वर्ष 1998 में कुआनो नदी से आई प्रलयकारी बाढ़ को भूल गए है। इस वर्ष बांध का मरम्मत नहीं कराया गया। जिसके कारण बांध पर जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं। जिससे बांध कमजोर हो गया है।
अवधेश कुमार
इंसेट
कुआनो नदी के किनारे बना बांध हो या घाघरा नदी का एमबीडी बांध मरम्मत न होने की वजह से यह दोनों बांध काफी कमजोर हो गए हैं। बांधों की हालत देखकर साफ पता चल रहा है की नदी के बाढ़ के पानी का दबाव बांध नहीं झेल पाएंगे।
-कृष्ण नाथ उर्फ नीतू
घाघरा नदी और कुआनो नदी के किनारे बने बांध पूरी तरह से सुरक्षित है। बांध पर अगर कहीं गड्ढा है तो उसमें मिट्टी भरने का काम किया जा रहा है। बांध का कोई खतरा नहीं होने दिया जाएगा।
-सतीश चंद्र, सहायक अभियंता, ड्रेनेज खंड
इंसेट
सात किमी में 60 से अधिक जगह चूहों ने बांध को कर दिया है खोखला
मेंहदावल। राप्ती नदी के किनारे करमैनी- बेलौली तटबंध है। इस बांध के किनारे बसा ग्राम पंचायत डुमरिया बाबू के पास तटबंध को चूहों ने खोखला कर दिया। पिछली बरसात में भी चूहों के कारण खोखला हुए इस तटबंध पर राप्ती के जलस्तर के कारण रिसाव की समस्या सामने आई थी, तब अधिकारी मारे-मारे फिर रहे थे।
मेंहदावल विकासखंड क्षेत्र के पूर्वी उत्तरी कोने पर स्थित करमैनी बेलौली तटबंध की हालत वर्तमान समय में काफी खराब है। वैसे तो शासन की स्वीकृति के बाद करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से बांध के उच्चीकरण व चौड़ीकरण समेत कई कार्य हुए, लेकिन डेनेज खंड द्वितीय के जरिए तटबंध के विकास कार्यों में गंभीरता नहीं दिखाई गई। नतीजा यह है कि डुमरिया बाबू गांव के समीप तटबंध में चूहों ने खोखला कर दिया है। वहीं नौगों ग्राम सभा के आगे बेलौहा ग्राम पंचायत के बीच में कई स्थानों पर चूहों ने तटबंद को खोखला बना दिया है। क्षेत्रीय निवासी अवनींद्र नाथ त्रिपाठी, मानवेंद्र प्रताप सिंह, सुनील चौधरी, जगदंबा तिवारी, मकसूदन तिवारी, जयप्रकाश यादव, श्रीराम यादव, रामकरन यादव, श्याम करन यादव, विनोद शर्मा ने कहा कि करमैनी-बैलौली तटबंध की हालत काफी नाजुक है। कई स्थानों पर चूहों ने तटबंध को खोखला कर दिया है। यदि अनजान बनकर तटबंध पर सफर कर रहे है तो वह जानलेवा साबित हो सकता है। अवर अभियंता वीरेंद्र कुमार यादव ने बताया कि करमैनी- बेलौली तटबंध की सुरक्षा के लिए हर कदम उठाया जा रहा है। चूहों के जरिए कई स्थानों पर तटबंध में छेद करने का मामला संज्ञान में आया है। जिसे गंभीरता के साथ लेते हुए तटबंध को पूरी तरह से सुरक्षित व मजबूत कराने की दिशा में पहल की जा रही है।
कुआनो नदी के किनारे बने बांध पर रामपुर उत्तरी बांध पर जगह जगह कट बना।