बारिया के बाद बडगों के पास सड़क पर लगा पानी।
संतकबीरनगर। जिले में सुबह सुबह बारिश के साथ ही ओले भी पड़े। इसके चलते किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ओले और बारिश का हालांकि आंशिक प्रभाव रहा, लेकिन किसानों की मुश्किलें बदलते मौसम में बढ़ती दिखाई दे रही हैं। इससे किसानों की सरसों की फसल के साथ ही गेहूं की फसल पर भी आंशिक प्रभाव पड़ा है।
रविवार से ही आसमान में बादलों की आवाजाही ने सोमवार सुबह बूंदाबांदी के रूप में परिवर्तित हो गई। दोपहर तक आसमान में बादल छाए रहे शाम के समय आसमान साफ हुआ तो मौसम में गर्मी भी आ गई। लेकिन बादलों की आवाजाही और बूंदाबांदी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। इसका नतीजा हुआ कि सोमवार की सुबह आसमान में काले बादल मंडराने लगे और उसके बाद बूंदाबांदी शुरू हो गई।
सोमवार के दोपहर तक बादलों से आसमान ढंका रहा दोपहर बाद धूप हुई तो मौसम में गर्मी भी आ गई। किसान रामकेश, रामस्वरूप, रामसरीक, गोरखनाथ, महादेव आदि का कहना है कि खेत में हुई बारिश से किसानों का आंशिक नुकसान हुआ है। गेहूं की फसल पकने के कगार पर है, वहीं सरसों की कटाई चल रही है। मौसम अगर फिर बदला तो नुकसान बढ़ सकता है।
बारिश से सड़कों के किनारे भरा पानी : बारिश होने से सुबह सड़कों के किनारे भी पानी लग गया था। स्थिति यह थी कि सड़क के किनारे छोटे गड्ढों में पानी भरा रहा। इसके चलते राहगीरों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कच्ची सड़कों पर मिट्टी गीली हो जाने से कई वाहन फिसलकर भी गिर गए।
फसल पर प्रभाव : वर्तमान में गेहूं की फसल पक रही है, तो सरसों की फसल पककर तैयार हो गई है। सरसों की इस फसल की कटाई चल रही है। तेज बारिश होने पर गेहूं की बाली काली पड़ सकती है। यही नहीं सरसों भीगने से खराब हो सकता है। इस समय इस तरह का मौसम खेती के अनुकूल नहीं है।