बिखरा पक्षी बिहार से पक्षी को खरीदकर ले जाता युवक।
बखिरा। ठंड के मौसम में बखिरा झील में प्रवास के लिए आने वाले पक्षियों को शिकारी झील में ही मार दे रहे हैं। स्थिति यह है कि सुविधा शुल्क की आड़ में इन पक्षियों का शिकार लगातार जारी है। सरकारी दावे पूरी तरह से थोथे साबित हो रहे हैं। हजारों किलोमीटर की लंबी यात्रा करके दूर देश से बखिरा झील में आने वाले पक्षियों को जहर देकर मार दिया जा रहा है।
बखिरा झील को 32 वर्ष पूर्व पक्षी विहार घोषित किया गया था। उसी समय यहां पर कर्मचारियों के आवास के साथ ही वाच टॉवर और अन्य बुनियादी व्यवस्थाओं का निर्माण किया गया था। इसके बाद से अब तक यहां कोई नया निर्माण नहीं किया गया। झील में अक्टूबर माह में हर वर्ष हजारों किमी की यात्रा करके प्रवासी पक्षी बखिरा झील के 29 वर्ग किलोमीटर में फैले सुरक्षित पनाहगाह में आते हैं।
पक्षियों के शिकार पर रोक लगाने के लिए आधा दर्जन वनकर्मियों की तैनाती के साथ ही कई कार्यालय बने, लेकिन सब बेमतलब साबित हो रहे हैं।
हजारों की संख्या में लालसर, टिकिया, हुदहुद, पटेरा समेत दर्जनों प्रजाति की चिड़िया चार माह तक झील में बसेरा करती हैं। लेकिन सुरक्षित पनाहगाह में आए यह प्रवासी पक्षी शिकारियों का शिकार हो जाते हैं। इन शिकारियों से चिड़िया खरीदने के लिए स्थानीय लोग तो आते ही हैं, गोरखपुर, महराजगंज, बस्ती, सिद्धार्थनगर जिले से भी चिड़ियों के मांस के शौकीन आते हैं।