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जीएसटी सुधार : जनता की जेब को राहत, व्यापारियों को सरलता

Sat, 23 Aug 2025 11:36 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
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श्रवण अग्रहरि, वरिष्ठ अ​धिवक्ता, टैक्स
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संतकबीरनगर। देश की कर व्यवस्था में सुधार की दिशा में जीएसटी दरों में हालिया बदलाव आम जनता और व्यापारियों दोनों के लिए सुखद संदेश लेकर आए हैं। वर्षों से 5, 12, 18 और 28 फीसदी की चार दरों के जाल में उपभोक्ता, व्यापारी और अधिवक्ता सभी उलझे रहते थे। इससे जहां जनता को राहत मिलेगी, वहीं व्यापारियों को भी इसको सरल तरीके से समझने और लागू करने में सहयोगी मिलेगा।
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यह कहना है जिले के कर अधिवक्ता श्रवण अग्रहरि का जिन्होंने हालिया टैक्स सुधारों को लेकर व्यापारियों और आम जनता के लिए सुखद संकेत बताया है। उनका कहना है कि अलग-अलग टैक्स, हर बिल में अलग गणना और हर विवाद में जटिल व्याख्याएं– यही इस व्यवस्था की सबसे बड़ी परेशानी थी। अब मंत्रियों के समूह ने बड़ा निर्णय लेते हुए 12 फीसदी और 28 फीसदी स्लैब को समाप्त कर केवल 5 और 18 फीसदी की दरें रखने की सिफ़ारिश की है। यह कदम निश्चित ही देश की कर प्रणाली को सरल और सहज बनाएगा।
जनता के लिए सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि 12 फीसदी पर कर दिए जाने वाले रोज़मर्रा के सामान अब 5 फीसदी में उपलब्ध होंगे,यानी खाद्य पदार्थ, कपड़े और अन्य घरेलू वस्तुएं सस्ती होंगी। इसी प्रकार 28 फीसदी वाले महंगे उत्पाद अब 18 फीसदी पर आ जाएंगे,जिससे टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन और फर्नीचर जैसी चीजें किफ़ायती होंगी। यह न सिर्फ़ उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ घटाएगा बल्कि बाजार में मांग को भी बढ़ाएगा।
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उन्होंने कहा कि व्यापारी वर्ग के लिए भी यह निर्णय राहत का संदेश है। अब उन्हें अलग-अलग दरों पर बिल बनाने और जटिल अनुपालन की समस्या से छुटकारा मिलेगा। रिटर्न दाखिल करना आसान होगा और व्यवसाय करने में सहजता आएगी।
अधिवक्ताओं और कर सलाहकारों के लिए भी यह सुखद है, क्योंकि अब टैक्स दरों की व्याख्या को लेकर होने वाली अनावश्यक मुकदमेबाजी में भारी कमी आएगी। इससे न्यायालयों पर बोझ भी घटेगा और कर प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी।
हाँ, कुछ राज्यों ने राजस्व में कमी की आशंका जताई है और केंद्र से मुआवजे की मांग की है। इस पर केंद्र सरकार को संवेदनशीलता के साथ कदम बढ़ाना होगा ताकि संघीय ढांचे का संतुलन कायम रह सके। यदि आगामी जीएसटी परिषद इस प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति देती है, तो यह सुधार आम जनता की जेब में राहत, व्यापारियों के काम में सरलता और अधिवक्ताओं के लिए विवादों में कमी–तीनों का संतुलन बनाकर देश की कर प्रणाली को और अधिक पारदर्शी, व्यावहारिक तथा जनता हितैषी बनाएगा।
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