संतकबीरनगर। विद्युत निगमों के निजीकरण के विरोध में मंगलवार को बिजली कर्मियों ने अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर धरना दिया। इस दौरान बिजली कर्मियों ने कहा कि झूठे आंकड़ों के आधार पर निजीकरण की साजिश की जा रही है। यह उपभोक्ताओं व कर्मचारियों के हित में नहीं है। ऐसे में निजीकरण का प्रस्ताव त्रस्त किया जाए।
विद्युत संघर्ष समिति के पदाधिकारी अशोक कुमार ने कहा कि मनमाने ढंग से निजीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई है। साथ ही केंद्र सरकार इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल ला रही है। इसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह बिल पूरे ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण का दस्तावेज है। इसका सीधा दुष्प्रभाव किसानों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
संघर्ष समिति के पदाधिकारी दिलीप सिंह ने कहा कि यदि कोई किसान 10 हॉर्स पावर का पंप प्रतिदिन 10 घंटे चलाता है, तो उसे प्रति माह लगभग 2250 यूनिट बिजली खपत पर करीब 22,500 रुपये का भुगतान करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि निजीकरण का सबसे बड़ा आर्थिक आघात किसानों पर ही पड़ेगा। धरना में इंजीनियर मुकेश गुप्ता, सुनील प्रजापति, सूरज प्रजापति, नारायण चंद्र चौरसिया आदि मौजूद रहे।