संतकबीरनगर। पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत निगमों के निजीकरण के विरोध में बुधवार को बिजली कर्मियों ने अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर धरना दिया। इस दौरान बिजली कर्मियों ने कहा कि कॉर्पाेरेट घरानों से मिली भगत और बड़े घोटाले की आशंका को देखते हुए निजीकरण का निर्णय निरस्त किया जाए।
संघर्ष समिति के पदाधिकारी इंजीनियर धनंजय सिंह ने कहा कि निजीकरण के मामले में प्रारंभ में ही जिस प्रकार अवैध ढंग से ट्रांजेक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति की गई उससे बड़े घोटाले की आशंका बढ़ गई थी। सरकार को चाहिए कि इसकी उच्चस्तरीय जांच कराए और निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त किया जाए। संघर्ष समिति के पदाधिकारी इंजीनियर अजय चौरसिया ने कहा कि निजीकरण का फैसला उपभोक्ताओं व कर्मियों के हित में नहीं है।
उन्होंने कहा कि निजीकरण का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। संघर्ष समिति के पदाधिकारी धीरेंद्र नाथ यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री को तत्काल हस्तक्षेप कर सारी प्रक्रिया रोक देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बिजली कर्मचारी, किसान, उपभोक्ता मिलकर निजीकरण के विरोध में अभियान और संघर्ष तब तक जारी रखेंगे जब तक कि निजीकरण का फैसला वापस नहीं लिया जाता।
धरना प्रदर्शन में इंजीनियर मुकेश गुप्ता, बेचन प्रसाद, वैष्णव, सुनील प्रजापति, सूरज, प्रजापति, हरिप्रसाद, मनीष मिश्रा, पुष्पेंद्र भारती, प्रदुम्न कुमार, श्रवण प्रजापति, उमेश चौधरी, विजय कुमार, योगेंद्र चौहान, विवेकानंद नायक, संजय यादव, देवदत्त पासवान मौजूद रहे।