पुलिस की मौजूदगी में अंगद को दी गई रकम।
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रकम जमा आए दिव्यांग से उच्चके द्वारा छीने गए एक लाख मंगलवार सुबह पौली स्थित पूर्वांचल बैंक की शाखा के अंदर सफाई करते समय कूड़े की ढेर में मिले। जबकि इस मामले में घटना के तीन दिन बाद भी केस दर्ज नहीं किया गया था। वहीं रकम मिलने से पुलिस ने भी राहत की सांस ली।
शनिवार को पौली स्थित पूर्वांचल ग्रामीण बैंक की शाखा में ऊदहा गांव निवासी दिव्यांग अंगद पैसा जमा करने गए थे। जब वह कैश काउंटर पर रुपये जमा करने के लिए आधार कार्ड निकाल रहे थे, तभी पॉलीथिन में रखे उसके एक लाख रुपये किसी उचक्के ने उड़ा दिया था। उसके द्वारा शोर मचाए जाने पर तत्काल बैंक का शटर बंद करके पुलिस ने सबकी तलाशी ली थी, लेकिन कामयाबी नहीं मिली थी।
इस मामले में पीड़ित ने पुलिस को तहरीर देकर केस दर्ज किए जाने की मांग की तो पुलिस ने उसे डांट डपट कर शांत रहने के लिए विवश कर दिया। बंदी के बाद मंगलवार को जब बैंक की सफाई कर्मचारी आविदा खातून झाडू लगा रही थी तो उसे कूड़े की ढेर में वजनदार पॉलीथीन मिली। जिसे वह मौके पर मौजूद सिपाही लक्ष्मण को दिखाई। नोटों की गड्डी और अंगद का आधार कार्ड पॉलिथीन में मिली तो सबका माथा ठनक गया।
जो लोग उस दिन उसे झूठा बता रहे थे, वही लोग आज सफाई कर्मचारी की ईमानदारी और अंगद की बातों में दम होने की बात कहके मुकदमा दर्ज न करने वाली पुलिस पर उंगली उठा रहे थे। शाखा प्रबंधक सुबोध सिंह ने बताया कि बैंक में मिला रुपये अंगद के ही है, जिसे उन्हें दे दिया गया। जबकि चौकी इंचार्ज अवधेश पांडेय ने बताया कि अंगद ने केस दर्ज कराने के लिए थाने पर नही गया था, वरना मुकदमा अवश्य लिखा गया होता।
शुक्र है! रकम मिल गई ः मंगलवार सुबह जब दिव्यांग अंगद को छिनी गई रकम के मिलने की सूचना मिली तो वह खुशी से झूम उठा। उसके मुंह से यही निकला कि खून पसीना बहाकर एक- एक रुपये जुटाए थे। भगवान का शुक्र है, कि उन्होंने गरीब को उजड़ने से बचा लिया। दूसरी तरफ बैंक की सफाईकर्मी आविदा खातून की ईमानदारी की दाद दी। ऊदहा गांव निवासी दिव्यांग अंगद ने बताया कि बैंक में जमा करने के प्रयास के दौरान ही उच्चका एक लाख रुपये लेकर भाग गया था। इस संबंध में जब वह प्रार्थना पत्र लेकर पुलिस चौकी पौली पर गया तो प्रार्थना पत्र तो ले लिया गया लेकिन इतना धमकाया गया कि वह दुबारा रकम के संबंध में पुलिस से बात करने का साहस नहीं जुटा पाया। अंगद का कहना है कि एक हाथ से लोगों के वहां मजदूरी करके उसने और पत्नी से मिलकर रकम जुटाई थी। जब बैंक के कैश काउंटर से गायब हुई तो मेरा पूरा परिवार सदमे में आ गया। तभी से न तो उन्होंने भरपेट भोजन न तो वह किया और न ही पत्नी। रुपये गायब होने से उतना कष्ट नहीं हुआ जितना झूठा बनाए जाने से हुआ, लेकिन भगवान ने उसकी प्रार्थना सुन ली।