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बाढ़-अतिवृष्टि से नुकसान फसल का होगा सर्वे

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राजस्व विभाग के अनुसार, बाढ़ से 3537 हेक्टेयर और अतिवृष्टि से 3183.476 हेक्टेयर फसल को पहुंची है क्षति
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शोभित कुमार पांडेय
संतकबीरनगर। बाढ़ और अतिवृष्टि से नुकसान हुई फसलों का सर्वे होगा। इसका जिम्मा लेखपाल और कृषि विभाग के कर्मियों को सौंपा गया है। डाटा फीडिंग के बाद क्षतिग्रस्त फसल के मुआवजे की रकम सीधे खाते में भेजी जाएगी। लेखपालों से एक सप्ताह में सर्वे करके रिपोर्ट मांगी गई है।
जिले में इस वर्ष 94016 हेक्टेयर में धान की खेती हुई है। यहां से घाघरा, राप्ती, आमी, कुआनो और कठिनईयां नदी गुजरती हैं। बारिश के समय बखिरा झील भी ओवर फ्लो हो जाती है। बाढ़ व अतिवृष्टि से कृषि विभाग के कर्मियों की ओर से जो आंकलन पूर्व में किया गया था, उसके मुताबिक 10390 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फसल प्रभावित हुई थी। इसमें चार ब्लॉकों में ज्यादा नुकसान हुआ है। हैंसर बाजार ब्लॉक क्षेत्र में 86 गांव प्रभावित हुए। प्रभावित क्षेत्रफल 35 से 40 प्रतिशत का अनुमान है। बेलहर कला ब्लॉक में 47 गांव और प्रभावित क्षेत्रफल 40 से 45 प्रतिशत , मेंहदावल क्षेत्र में 23 गांव और प्रभावित क्षेत्रफल 30 से 35 प्रतिशत और बघौली ब्लॉक क्षेत्र में 19 गांव व प्रभावित क्षेत्रफल 30 से 35 प्रतिशत का आंकलन है।
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जिला कृषि अधिकारी पीसी विश्वकर्मा ने बताया कि जिन क्षेत्रों में पानी कम हो गया है, या कम हो रहा है, वहां फसल सामान्य हो रही है। किसानों की ओर से उचित प्रबंध किए जाने की वजह से फसल सामान्य हो रही है।
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एडीएम संजय कुमार पांडेय ने बताया कि आपदा कार्यालय में राजस्व विभाग की ओर से जो रिपोर्ट मिली है ,उसके मुताबिक बाढ़ से 3537 हेक्टेयर फसल और अतिवृष्टि से 3183 .476 हेक्टेयर फसल की क्षति हुई है। फसलों की क्षति का वास्तविक आंकलन किए जाने के लिए लेखपाल और कृषि विभाग के कर्मियों की संयुक्त टीम से प्लॉटवार सर्वे कराया जा रहा है। मौके पर पहुंच कर टीम सर्वे कर रही है कि किस किसान का कितने रकबे की फसल बाढ़ और अतिवृष्टि से प्रभावित हुई है। निर्देश है कि लेखपाल अपनी आईडी में जिन किसानों की फसल क्षतिग्रस्त हुई है, उनका नाम, खाता नंबर, मोबाइल नंबर, कितना रकबा प्रभावित हुआ है आदि सूचनाएं फीड करेंगे। उसके बाद सीधे किसानों के खाते में मुआवजे की रकम भेजी जाएगी। प्रति बीघे 6800 रुपये की दर से मुआवजा दिए जाने का नियम है। लेखपालों को निर्देश दिए गए है कि एक सप्ताह के भीतर सर्वे करके रिपोर्ट प्रेषित करें। जिससे किसानों को उनकी क्षतिग्रस्त फसल के मुआवजे की रकम खाते में भेजवाई जा सके।
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