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Sant Kabir Nagar News: अहिरौली प्रथम के प्रधान का वित्तीय अधिकार सीज

Thu, 06 Jun 2024 12:46 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
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सेमरियावां। ब्लाॅक के ग्राम पंचायत अहिरौली प्रथम के प्रधान पर प्रशासनिक गाज गिरी। ग्राम पंचायत में सरकारी धनराशि के दुरुपयोग के आरोप में ग्राम प्रधान के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार को सीज कर दिया गया है। यह कार्रवाई गांव वालों की शिकायत के बाद जांच में दोषी पाए जाने पर डीएम ने की है। इस मामले की अंतिम जांच के लिए जिला उपायुक्त श्रम रोजगार को सौंपी गई है। ग्राम पंचायत का विकास कार्य प्रभावित न हो इसके लिए खाते के संचालन के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन के लिए ग्राम पंचायत सदस्यों की सूची मांगी गई है। डीएम ने डीपीआरओ को तत्कालीन ग्राम सचिव पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का निर्देश दिया है।
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अहिरौली प्रथम गांव के जयराम पुत्र पल्टू ने 15 बिंदुओं और गांव के ही उमेश सिंह पुत्र गनपत सिंह ने पांच बिंदुओं पर ग्राम प्रधान के खिलाफ शिकायत की थी। मामले की जांच के लिए भूमि संरक्षण अधिकारी, सिंचाई एवं जल संसाधन और सहायक अभियंता नलकूप खंड की टीम गठित कर जांच आख्या उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। जांच अधिकारियों ने जांच पूर्ण कर जांच आख्या प्रस्तुत किया। जांच अधिकारियों की रिपोर्ट के मुताबिक शिकायत कर्ता उमेश सिंह पांच बिंदुओं की शिकायत में बिंदु संख्या पांच पर की गई शिकायत एवं जयराम की 15 बिंदुओं की गई शिकायत में बिंदु संख्या आठ एक समान है, जो कि परिवार रजिस्टर नवीनीकरण के लिए 21950 रुपये अनियमितता की गई है। इसके लिए ग्राम प्रधान विनय सिंह एवं तत्कालीन ग्राम सचिव मोहम्मद अफजल दोषी पाए गए हैं।
ग्राम प्रधान व ग्राम सचिव को एक पक्ष का अवसर देते हुए कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण देने को कहा गया था। एक पक्ष बीत जाने के बाद भी प्रधान व ग्राम सचिव ने 23 फरवरी 2024 तक अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किया। स्पष्टीकरण करण प्राप्त न होने के कारण ग्राम प्रधान व ग्राम सचिव को अनुस्मारक पत्र निर्गत कर तीन दिन के अंदर स्पष्टीकरण उपलब्ध कराने के अंतिम अवसर दिया गया।
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डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने बताया कि नोटिस के बाद स्पष्टीकरण नहीं उपलब्ध नहीं कराया गया जिससे प्रथम दृष्टया साबित है कि जांच अधिकारी द्वारा पाई गई अनियमितता ग्राम प्रधान व ग्राम सचिव को स्वीकार है, तथा इन्हें अपने बचाव में कुछ नहीं कहना है। 21950 रुपये की अनियमितता में ग्राम प्रधान व ग्राम सचिव दोषी पाए गए हैं।
कार्रवाई करते हुए डीएम ने ग्राम प्रधान को प्रथम दृष्टया दोषी माना है तथा उनके प्रधान पद के वित्तीय तथा प्रशासनिक अधिकारों पर तत्काल प्रभाव से लगा दिया है। पंचायत के विकास कार्यों को संपादित करने के लिए पंचायत सदस्यों की तीन सदस्यीय समिति का गठन के लिए ग्राम पंचायत सदस्यों की सूची मांगी है। डीपीआरओ को तत्कालीन ग्राम सचिव पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए निर्देशित किया है।
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