धान की बालियों में दाने आ गए, हवा और बारिश से गिर गई हैं फसलें
संवाद न्यूज एजेंसी
हरिहरपुर। बारिश के चलते लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत तो मिली है वहीं धान की फसलों में लगने वाली बीमारियों को लेकर किसान चिंतित हैं। किसानों का कहना है कि जिन अगेती धान की बालियों में दाने आ गए थे वे फसलें हवा और बारिश से गिर गई हैं, जिससे पैदावार प्रभावित होगी। साथ ही गिरी हुई फसलों की कटाई को लेकर भी किसान परेशान हैं।
गिरी हुई धान के फसलों की कंबाइन से कटाई होना मुमकिन नहीं है, जिसके चलते धान के कटाई की लागत भी बढ़ जाएगी। जिन फसलों की बालियां निकल रही हैं, उन फसलों में बारिश के चलते कंडवा रोग फैलने की संभावना बढ़ गई है। ऐसे में फसलों के बीमारियों की चपेट में आने की संभावना से किसान चिंतित हैं।
क्या है कंडवा रोग
कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर एके सिंह ने बताया कि धान की फसल में लगने वाला कंडवा रोग फंफूद की वजह से होता है। धान की बालियां निकलते समय बारिश होने पर खेत में नमी ज्यादा हो जाती है। जिससे धान की बालियों में फंफूदी लगने की संभावना बढ़ जाती है। इस रोग से प्रभावित धान की बालियों पर काले रंग की गांठ बन जाती है, जिसे फोड़ने पर पीले रंग जैसा पदार्थ निकलता है। बालियों पर लगने वाली यह बीमारी फसल के पैदावार को काफी प्रभावित करती है। यह पूर्वांचल में धान की फसलों को प्रभावित करने वाली बड़ी बीमारी है। इसके रोकथाम के लिए किसानों को प्रभावित खेतों में फंगीसाइड्स और कीटनाशकों का छिड़काव करना चाहिए।
बोले किसान
बारिश के चलते अगेती धान को नुकसान पहुंचा है। तेज हवा के चलते धान की फसलें गिर गई हैं। अब जिन धान की फसलों में बालियां निकल रही हैं उनमें कंडवा रोग लगने की काफी संभावना है। जिन फसलों में बालियां निकल रही हैं उन्हें रोग से बचाने के लिए किसानों को फंगीसाइड और कीटनाशक का छिड़काव करना चाहिए।
- हनुमान पटेल, परशुरामपुर
बीते दिनों हुई बारिश से देर में तैयार होने वाली धान की फसलों को तो संजीवनी मिली है, लेकिन अगेती फसलों को नुकसान हुआ है। बारिश और हवा के चलते गिर गई धान की कटाई किसानों के लिए बड़ी चुनौती है। जिन फसलों में बालियां निकल रही हैं वे नमी के चलते फफूंद से होने वाली बीमारियों की चपेट में आ सकती हैं।
- बृजेश चौधरी, नाथनगर