संतकबीरनगर। किसानों के लिए वरदान बताई जा रही प्रधानमंत्री कृषि बीमा योजना बीमा कंपनी को लाभ पहुंचा रही है। किसान के केसीसी खाते से ऋण लेते ही स्वत: फसल बीमा का प्रीमियम कट जाता है। बदले में किसान को कोई पत्र नहीं मिलता। क्षतिपूर्ति की प्रक्रिया भी इतनी जटिल है कि चुनिंदा किसानों को ही इसका लाभ मिल रहा है। पिछले वर्ष रबी में 2186 और खरीफ में 186 किसानों को ही लाभ मिला। जबकि बीमा कंपनी को किसानों के प्रीमियम के तौर पर तीन करोड़ से ज्यादा मिला। इसमें केंद्र व राज्य का अंश अलग है।
भाजपा ने पिछले लोकसभा चुनाव घोषणा पत्र में किसानों को उद्योगपतियों की तरह बीमा सुरक्षा का वादा किया था। इसके लिए सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू भी की। इसके तहत प्रत्येक किसान की ओर से बोए गए फसल के औसत उत्पादन के हिसाब से बीमा का प्रीमियम तय किया गया। खरीफ की फसलों के लिए बीमा प्रीमियम दो प्रतिशत तथा रबी के लिए डेढ़ प्रतिशत है। नकदी व बागवानी फसल के लिए प्रीमियम की दर पांच प्रतिशत है। कृषि विभाग के आंकड़े के अनुसार जिले में दो लाख 26 हजार किसान हैं। वर्ष 2017-18 के खरीफ सीजन में 25661 किसानों के बैंक खातों (केसीसी खाता) से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रीमियम के तौर पर एक करोड़ 97 लाख 16 हजार बीमा कंपनी को ट्रांसफर किया गया।
केद्रांश व राज्यांश मिलाकर कंपनी को चार करोड़ 32 लाख 90 हजार मिले। फसल खराब होने पर सिर्फ 2186 किसानों को 89 लाख 39 हजार मिले। रबी सीजन के लिए 18053 किसानों के खाते से प्रीमियम के तौर पर एक करोड़ 25 लाख 27 हजार 13 का प्रीमियम भरा गया, लेकिन फसल खराब होने पर सिर्फ 186 किसानों को क्षतिपूर्ति के रूप में दो लाख 27 हजार का भुगतान किया गया। इस वर्ष खरीफ सीजन के लिए 32904 किसानों की फसल का बीमा करते हुए प्रीमियम के तौर पर दो करोड़ 63 लाख सात हजार 606 रुपये का प्रीमियम भरा है। जबकि अब तक एक भी किसान को क्षतिपूर्ति नहीं मिली है।