सेमरियावां। बारिश के बाद क्षेत्र में धान की रोपाई का काम तेज हो गया है। ऐसे समय किसानों को सबसे अधिक जरूरत यूरिया और डीएपी की होती है लेकिन इस बार समस्या खाद की उपलब्धता नहीं बल्कि उसे प्राप्त करने की प्रक्रिया चुनौती बनी है। साधन सहकारी समितियों और खाद केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया होने के बावजूद किसान फार्मर रजिस्ट्री और अन्य जरूरी दस्तावेज के अभाव में समितियों से खाली हाथ लौट रहे हैं।
सेमरियावां ब्लाॅक में दस साधन सहकारी समिति हैं। इनमें सिसवादाखिली, परसाशेख, गंगैचा, सेमरियावां, बिगरामीर, सालेहपुर, बाघनगर, उमिला, पैली खास, बूधाकला शामिल हैं। किसानों का कहना है कि पहले लंबी कतार में लगना पड़ता है, फिर फार्मर रजिस्ट्री, खतौनी और अन्य पहचान पत्रों की जांच होती है।
किसी भी दस्तावेज की कमी होने पर खाद नहीं दी जा रही है। कई किसान लगातार केंद्रों के चक्कर लगाने के बावजूद डीएपी यूरिया नहीं ले सके हैं। इससे धान की रोपाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
किसानों का कहना है कि सरकारी केंद्रों पर खाद उपलब्ध होने के बावजूद इतनी औपचारिकताएं पूरी करना उनके लिए कठिन हो गया है। मजबूरी में कुछ किसान दूसरे क्षेत्रों की समितियों का रुख कर रहे हैं, जबकि कई किसान निजी दुकानों से महंगे दाम पर खाद खरीदने को विवश हैं।
साधन सहकारी समितियों के सचिवों का कहना है कि उनके यहां यूरिया का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। शासन के निर्देशों के अनुसार केवल उन्हीं किसानों को खाद वितरित की जा रही है जिनकी फार्मर रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है। जिन क्षेत्रों में चकबंदी या अन्य कारणों से फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो सकी है, वहां खतौनी के आधार पर खाद उपलब्ध कराई जा रही है।
कृषि विभाग का दावा है कि जिले में यूरिया और डीएपी की कोई कमी नहीं है। अधिकारियों के अनुसार खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और किसानों को निर्धारित मानकों के अनुसार खाद वितरित की जा रही है।
एक हेक्टेयर भूमि के लिए खरीफ फसल हेतु सात बोरी यूरिया और चार बोरी डीएपी का प्रावधान है, जबकि फार्मर आईडी पर निर्धारित सीमा के अनुसार ही खाद दी जा रही है।
हालांकि किसानों का कहना है कि जब खेतों में समय पर खाद डालना जरूरी हो, तब दस्तावेजी औपचारिकताओं में उलझना उनकी खेती पर भारी पड़ रहा है। उनका कहना है कि सरकार को फार्मर रजिस्ट्री की प्रक्रिया सरल बनानी चाहिए और जिन किसानों की रजिस्ट्री अभी पूरी नहीं हो सकी है, उन्हें वैकल्पिक दस्तावेजों के आधार पर तत्काल खाद उपलब्ध कराई जाए, ताकि धान की रोपाई प्रभावित न हो।
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खाद केंद्र पर डीएपी, यूरिया होने की बात कही जाती है, लेकिन फार्मर रजिस्ट्री नहीं होने पर वापस भेज दिया जाता है। आए दिन से चक्कर लगा रहे हैं, फिर भी खाद नहीं मिली। धान की रोपाई का समय चल रहा है। खाद केंद्र पर यूरिया मौजूद है, लेकिन फार्मर रजिस्ट्री न होने के कारण दो दिन से खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। खेत में समय पर खाद नहीं पहुंची तो फसल प्रभावित होगी।
-अफजाल अहमद, सेहुड़ा
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पहले लाइन में लगो, फिर अलग-अलग दस्तावेज दिखाओं। हर बार कोई न कोई नई औपचारिकता बता दी जाती है। सरकार को ऐसे किसानों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए, जिनकी फार्मर रजिस्ट्री अभी नहीं हो सकी है।
-संतोष कुमार प्रजापति, डड़वामाली
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फार्मर रजिस्ट्री के बिना खाद नहीं मिल रही। खेती का काम रुका हुआ है। प्रशासन को किसानों की परेशानी समझते हुए तुरंत समाधान करना चाहिए। खाद की कमी नहीं है लेकिन कागजी प्रक्रिया इतनी लंबी हो गई है कि समय पर खाद मिलना मुश्किल हो रहा है। धान की रोपाई के इस मौसम में किसानों को राहत मिलनी चाहिए।
-एखलाक अहमद, भाटापारा ( बलईपुर)
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जिले में खाद की कोई कमी नहीं है। किसानों को फार्मर रजिस्ट्री कराना आवश्यक है। जिन क्षेत्रों में विशेष परिस्थितियां हैं, वहां खतौनी के आधार पर भी खाद उपलब्ध कराई जा रही है। शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही वितरण किया जा रहा है।
-डाॅ. सर्वेश कुमार यादव, जिला कृषि अधिकारी