संतकबीरनगर। अंग्रेजों के जमाने से लगने वाली बरदहिया बाजार मंडी सुविधाओं के अभाव का दंश झेल रही है। सप्ताह में तीन दिन गुलजार रहने वाली इस मंडी में न तो पीने के पानी की व्यवस्था है और न ही सड़कें ठीक हो सकी हैं। बारिश होने पर मंडी कीचड़ से सराबोर हो जाती है।
बरदहिया मंडी पूर्व में यहां पर पशुओं की बाजार लगती थी, लेकिन बाद में इसे कपड़ा मंडी के रूप में परिवर्तित कर दिया गया है। यहां पर कानपुर, सुल्तानपुर, अंबेडकरनगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर सहित नेपाल और बिहार से भी व्यापारी कारोबार के लिए आते हैं। सप्ताह में शनिवार की शाम से शुरू होने वाली यह बाजार सोमवार की दोपहर तक अनवरत चलती रहती है। रात में इस बाजार की रौनक और बढ़ जाती है। शनिवार से ही व्यापारी दुकानें सजाने लगते हैं।
बाजार में आने-जाने में लिए जो मार्ग बने हैं वह बदहाल हैं। गर्मी के मौसम में धूल उड़ती है, तो बरसात के मौसम में बारिश होने के बाद कीचड़ जमा हो जाता है। यहां पेयजल के लिए भी कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। सार्वजनिक शौचालय भेली मंडी में बनाया गया है, जो बरदहिया से काफी दूर है।
बाजार में बाजार मालिक ने एक शौचालय बनाया है जो यहां पर आने वाले व्यापारियों के लिए नाकाफी है। वहीं सड़क तक दुकानें लगने से अक्सर जाम की समस्या से लोगों को जूझना पड़ता है। प्रशासन ने दुकानदारों को सख्त निर्देश दिए थे कि दुकानें नालियों के पीछे ही लगाए, लेकिन अब भी दुकानें सड़क तक लग रही हैं।