पडरौना। करीब छह साल तक जेल की सलाखों के पीछे रहने के बाद भी रिजवान की फितरत नहीं बदली। जेल से बाहर आते ही उसने समाज के लोगों की आंखों में धूल झोंकने के लिए सुधरने का दिखावा किया। पर्दे के पीछे वह देश को दहलाने की खतरनाक साजिश रच रहा था।
वर्ष 2023 में जेल से छूटने के बाद पडरौना लौटे रिजवान ने खुद को कर्मठ नागरिक के रूप में पेश किया। उसने शहर के छावनी में दुकान खोल ली। दिनभर लोगों के बीच रहने वाले रिजवान पर किसी को शक तक नहीं हुआ कि वह डिजिटल माध्यम से सीमा पार बैठे अपने आकाओं के संपर्क में है। सूत्रों के अनुसार, दुकान उसकी कमाई का जरिया नहीं बल्कि उसकी संदिग्ध गतिविधियों को छुपाने का पर्दा था। रिजवान जेल से छूटने के बाद दोबारा सक्रिय हो गया था। खुफिया एजेंसियों को शक है कि दुकान पर आने वाले सीधे-सादे युवाओं को चिह्नित करता रहा होगा, फिर उन्हें कट्टरपंथ के रास्ते पर धकेलने की कोशिश करता होगा। सूत्रों के अनुसार,उसकी गिरफ्तारी के बाद से उसके पास से बरामद सामान इस बात के सबूत हैं कि वह किसी खतरनाक वारदात को अंजाम देने की तैयारी में था। हालांकि, इसकी कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
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पढ़ाई के दौरान सीरिया के आतंकी यूसुफ के संपर्क में आया था रिजवान
वर्ष 2016 में जब मुंबई एटीएस ने कसया नगर के सबया से गिरफ्तार किया था, उस समय वह बुद्ध इंटर कॉलेज का छात्र था। टीम ने कॉलेज में उसकी गतिविधियों से जुड़ी जानकारी सहित जन्मतिथि के सत्यापन के लिए रिकाॅर्ड आदि खंगाला था। खुफिया एजेंसियों की जांच में रिजवान के सीरिया में बैठे आईएसआईएस के खतरनाक आतंकी यूसुफ से जुड़े मिले थे।
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घर वाले भी करतूतों पर डालते रहे पर्दा, अब भी कुछ बताने से इन्कार
संदिग्ध गतिविधियों में संलिप्त रिजवान की करतूतों पर घर के लोग भी पर्दा डालते रहे। इससे उसका मनोबल बढ़ता रहा। अब परिवार के लोग ऐसे किसी सवाल का जवाब देने से कन्नी काट रहे हैं। वे ऐसे अनभिज्ञ बन रहे हैं, जैसे रिजवान से उनका कोई संबंध ही नहीं हो। यह हालत सिर्फ परिवार के लोगों की ही नहीं है, मोहल्ले वालों का भी है। यह तस्वीर तब सामने आई है, जब यूपी एटीएस व दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल बीते शनिवार को रिजवान को 4/5 विस्फोटक अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं में दर्ज प्राथमिकी के मामले में दिल्ली ले गई है। पुलिस के अनुसार, मामले में रिजवान वांछित था।