संतकबीरनगर/मेंहदावल। परिषदीय विद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए विभाग की ओर से मानक निर्धारित किए गए हैं। इसके तहत निपुण भारत मिशन के तहत अब तक कक्षा एक से तीन तक के बच्चों में भाषा व गणित के लिए प्रभावी कार्य किया जा रहा था। अब इसका विस्तार कक्षा पांच तक कर दिया गया है, जिसमें अंग्रेजी, पर्यावरण अध्ययन (ईवीएस) को भी समाहित किया गया है।
जिला समन्वयक सामुदायिक शिक्षा रंजीत वर्मा ने बताया कि जिले में 1146 परिषदीय विद्यालयों में लगभग 1.12 लाख बच्चे अध्ययनरत हैं। बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता को नई दिशा देने और उनके सीखने के स्तर में सुधार लाने के उद्देश्य से विभाग ने मानक तय किए हैं। इनके आधार पर विद्यार्थियों के सीखने की क्षमता, शैक्षणिक प्रगति और उनकी उपलब्धियों की नियमित निगरानी होगी। सुरक्षित, सकारात्मक और प्रेरणादायक वातावरण विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा, जहां बच्चे बिना किसी भय और दबाव के बेहतर ढंग से सीख सकें। अब तक सरकार की महत्वाकांक्षी निपुण भारत मिशन योजना के तहत कक्षा एक से तीन तक के विद्यार्थियों में आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान विकसित करने पर विशेष जोर था।
अब इस पहल का विस्तार करते हुए कक्षा पांच तक के विद्यार्थियों के लिए भी नए अधिगम लक्ष्य और दक्षताएं निर्धारित की गई हैं। इन लक्ष्यों में हिंदी, अंग्रेजी, गणित और पर्यावरण अध्ययन (ईवीएस) जैसे प्रमुख विषय शामिल हैं। कक्षा तीन से कक्षा पांच तक के लिए दक्षताओं और अधिगम लक्ष्यों को अंतिम रूप दिए जाने के बाद निपुण संकल्प कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इस कार्यशाला के माध्यम से जिला एवं ब्लॉक स्तर के शैक्षणिक नेतृत्व, शिक्षकों और अकादमिक टीमों को नए ढांचे से जोड़ा जाएगा व इसके प्रभावी क्रियान्वयन की रणनीति तैयार की जाएगी।
डायट प्रवक्ता अभिष्टदेव पांडेय ने कहा कि नए मानक निर्धारण से शिक्षकों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। शिक्षकों को विद्यार्थियों को नियमित अभ्यास कार्य पाठ्यक्रम के अनुरूप देना होगा। उनकी प्रगति का मूल्यांकन करना होगा और सीखने में आने वाली कमियों को दूर करने के लिए आवश्यक सुझाव और मार्गदर्शन भी देना होगा। शासन स्तर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार आगे की कार्यवाही की जाएगी।