संतकबीरनगर। बिजली के निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों का धरना रविवार को भी जारी रहा। अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर कर्मियों ने प्रदर्शन किया और निजीकरण का प्रस्ताव वापस लेने की मांग की।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक इंजीनियर मुकेश गुप्ता ने कहाकि विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष ने उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन का अध्यक्ष रहते हुए बिजली कर्मचारियों के साथ लिखित समझौता किया था कि बिजली का निजीकरण नहीं किया जाएगा और विद्युत वितरण के मौजूदा ढांचे में ही बिजली व्यवस्था में सुधार का कार्य किया जाएगा। अब उनके द्वारा निजीकरण के संबंध में की गई टिप्पणी पूरी तरह से अनुपयुक्त है और इससे बिजली कर्मचारियों में रोष है।
उन्होंने कहाकि छह अक्तूबर 2020 को विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के साथ हुए लिखित समझौते में यह कहा गया है कि विद्युत वितरण की मौजूदा व्यवस्था बनाए रखते हुए बिजली कर्मचारियों को विश्वास में लेकर सुधार के कार्यक्रम किए जाएंगे। साथ ही उत्तर प्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र में किसी भी प्रकार का निजीकरण बिजली कर्मचारियों को विश्वास में लिए बगैर नहीं किया जाएगा। यह समझौता वित्त मंत्री सुरेश खन्ना एवं तत्कालीन ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा की उपस्थिति में हुआ था। जिसमें पावर कॉरपोरेशन के तत्कालीन अध्यक्ष अरविंद कुमार एक पार्टी है। अब उनके द्वारा निजीकरण की बात कहा जाना सीधे-सीधे इस समझौते का उल्लंघन है।
इस दौरान इं राजेश कुमार, प्रवेश यादव, आशीष मिश्रा, सुनील प्रजापति, सूरज प्रजापति, दिनेश चंद्र, दिलीप मौर्य, प्रद्दुम्न, विजय, प्रिंस गुप्ता, पुष्पेंद्र भारती, देव प्रकाश, राज कुमार, धीरेंद्र यादव, संतोष यादव, राम अचल यादव, पवन आदि मौजूद रहे।